1.02 करोड़ रुपये की निवेश ठगी का खुलासा, दो डायरेक्टर गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार

विदर्भ के 1100 से अधिक निवेशकों को बनाया गया शिकार

नागपुर में निवेश पर आकर्षक रिटर्न का लालच देकर 1 करोड़ 2 लाख रुपये की ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने विदर्भ अर्बन मल्टिपल ऑपरेटिव इंडिया निधि लिमिटेड कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में कंपनी के दो निदेशकों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी अभी भी फरार है।

दो आरोपी गिरफ्तार, मुख्य सूत्रधार की तलाश जारी

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पुलिस ने मामले में प्रमोद श्रीराम सोमकुंवर (मोहपा निवासी) और मंगेश सुभाष माकवडे (हुडकेश्वर रोड निवासी) को गिरफ्तार किया है। वहीं, इस पूरे रैकेट का कथित मास्टरमाइंड सुनील बावणे फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश की जा रही है।

कळमेश्वर, सावनेर और काटोल के निवेशकों से करोड़ों की वसूली

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कंपनी ने कळमेश्वर, सावनेर और काटोल तहसील के 1100 से अधिक निवेशकों से धन जुटाया था।

जांच के अनुसार:

  • कळमेश्वर के 140 निवेशकों से लगभग 13 लाख रुपये
  • सावनेर के 528 निवेशकों से करीब 66 लाख रुपये
  • काटोल के 463 निवेशकों से लगभग 24 लाख रुपये

जमा कराए गए थे।

FD और RD योजनाओं के नाम पर दिया गया झांसा

कंपनी की शाखा सावनेर रेलवे स्टेशन रोड पर संचालित की जा रही थी। यहां निवेशकों को रिकरिंग डिपॉजिट (RD) और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) योजनाओं में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाता था।

कंपनी द्वारा:

  • RD पर लगभग 8 प्रतिशत ब्याज
  • FD पर 6 प्रतिशत ब्याज
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देने का दावा किया गया था। अधिक मुनाफे के लालच में कई किसान, छोटे व्यापारी और मध्यमवर्गीय परिवार इस योजना में निवेश कर बैठे।

ऑफलाइन लेन-देन ने बढ़ाया संदेह

पुलिस जांच में पता चला है कि अधिकांश वित्तीय लेन-देन ऑफलाइन माध्यम से किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, कंपनी के आर्थिक व्यवहार में पारदर्शिता का अभाव था, जिससे निवेशकों के पैसे के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बैंक खाते पर मुख्य आरोपी का था नियंत्रण

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी का स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में मौजूद खाता पूरी तरह से फरार आरोपी सुनील बावणे के नियंत्रण में था। पुलिस को संदेह है कि वह YONO बैंकिंग ऐप के जरिए सभी वित्तीय लेन-देन संचालित कर रहा था।

अन्य कर्मचारियों को भी नहीं थी जानकारी

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पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि कंपनी के कई कर्मचारी और अन्य साझेदारों को वास्तविक वित्तीय लेन-देन की पूरी जानकारी नहीं थी। इससे यह आशंका और मजबूत हो गई है कि पूरे संचालन का नियंत्रण कुछ चुनिंदा लोगों के हाथ में था।

पुलिस कर रही विस्तृत जांच

पुलिस अब फरार आरोपी की तलाश के साथ-साथ कंपनी के अन्य आर्थिक रिकॉर्ड, बैंक खातों और निवेश संबंधी दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर ठगी की राशि और प्रभावित निवेशकों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है।

निवेशकों में चिंता का माहौल

मामले के सामने आने के बाद प्रभावित निवेशकों में चिंता और नाराजगी का माहौल है। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी इस योजना में निवेश की थी और अब उन्हें अपने पैसे वापस मिलने की उम्मीद पुलिस जांच पर टिकी हुई है।

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