सिर्फ 34 रुपये की फीस ने रोका था सपना, 56 की उम्र में ज्योति पाटील ने पास की दसवीं परीक्षा

चार दशक बाद फिर उठाई किताब, हासिल किए 61 प्रतिशत अंक

नागपुर से एक बेहद प्रेरणादायी और भावुक कहानी सामने आई है, जहां महज 34 रुपये की परीक्षा फीस न भर पाने के कारण अधूरी रह गई पढ़ाई को एक महिला ने 40 साल बाद फिर से शुरू किया और अब शानदार सफलता हासिल की है।

56 वर्षीय ज्योति गणेश पाटील ने उम्र की सभी सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए दसवीं बोर्ड परीक्षा में 61 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। उनके इस संघर्ष और सफलता की कहानी आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।

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गरीबी के कारण बीच में छूट गई थी पढ़ाई

ज्योति पाटील की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। जब वह दसवीं कक्षा में थीं, तब परीक्षा फीस के लिए केवल 34 रुपये की जरूरत थी, लेकिन परिवार की खराब हालत के कारण वह फीस जमा नहीं कर सकीं और उन्हें मजबूरी में अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी।

समय बीतता गया, लेकिन अधूरी पढ़ाई का दर्द उनके मन में हमेशा जिंदा रहा।

2025-26 सत्र में लिया दोबारा प्रवेश

करीब चार दशक बाद ज्योति पाटील ने हार नहीं मानी और वर्ष 2025-26 शैक्षणिक सत्र में पंचशील नाइट हाईस्कूल में दोबारा दसवीं कक्षा में प्रवेश लिया

उनका दिन बेहद संघर्षभरा था। दिनभर घर के काम और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के बाद वह रात में स्कूल जाकर पढ़ाई करती थीं।

लोगों ने उड़ाया मजाक, फिर भी नहीं टूटा हौसला

ज्योति पाटील को इस उम्र में पढ़ाई करने पर कई तरह की बातें सुननी पड़ीं। कुछ लोग कहते थे —
“इस उम्र में पढ़ाई की क्या जरूरत है?”

कई लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया, लेकिन कुछ लोगों ने उनका हौसला भी बढ़ाया। इन सबके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी ध्यान नहीं हटाया।

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61 प्रतिशत अंकों के साथ बनीं मिसाल

कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों के दम पर ज्योति पाटील ने आखिरकार दसवीं परीक्षा में 61 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी अधूरी ख्वाहिश पूरी कर ली

उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि:

“शिक्षा के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती।”

अब ग्रेजुएशन पूरा करने का सपना

ज्योति पाटील अब यहीं रुकना नहीं चाहतीं। उन्होंने आगे ग्रेजुएशन तक शिक्षा पूरी करने का संकल्प लिया है

उनकी यह कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है, जिन्होंने कभी परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ दिया था।

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