नागपुर: प्रेम संबंध में धोखा और हत्या के सनसनीखेज मामले में मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाया है। ‘दृश्यम’ फिल्म की तर्ज पर सबूत मिटाने की कोशिश करने वाले सैन्य जवान अजय आनंद वानखेडे की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। अदालत ने उपलब्ध ठोस साक्ष्यों को देखते हुए याचिका को गुणवत्ताहीन करार दिया।
यह निर्णय न्यायमूर्ति महेंद्र नेरलीकर ने सुनाया।
प्रेम जाल में फंसाकर किया धोखा
मामले में मृतका की पहचान ज्योत्स्ना प्रकाश आकरे (उम्र 32 वर्ष) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, आरोपी अजय वानखेडे पहले से विवाहित था, लेकिन उसने यह बात ज्योत्स्ना से छुपाई थी।
दोनों की पहचान मैट्रिमोनियल पोर्टल के जरिए हुई, जिसके बाद वानखेडे ने शादी का झांसा देकर उसे प्रेम संबंध में फंसा लिया।
शादी के दबाव के बाद रचा हत्या का षड्यंत्र
जब ज्योत्स्ना ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो आरोपी को अपना सच सामने आने का डर सताने लगा। इसी डर के चलते उसने हत्या की साजिश रची।
निर्जन इलाके में ले जाकर की निर्मम हत्या
घटना 28 अगस्त 2024 की है, जब ज्योत्स्ना आरोपी से मिलने पहुंची थी। आरोपी उसे वर्धा रोड के एक सुनसान इलाके में ले गया, जहां उसने पत्थर से सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी।
शव को गड्ढे में दफनाकर डाला सीमेंट
हत्या के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने के लिए डोंगरगांव टोल प्लाजा के पास गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया और उस पर सीमेंट का लेप चढ़ा दिया, ताकि किसी को शक न हो।
सबूत मिटाने के लिए फिल्मी अंदाज में की चालाकी
पुलिस से बचने के लिए आरोपी ने पूरी योजना फिल्म ‘दृश्यम’ की तरह बनाई
- अपना मोबाइल घर पर ही छोड़ दिया
- मां का मोबाइल साथ लेकर गया
- मृतका का मोबाइल हैदराबाद जाने वाले ट्रक में फेंक दिया, जो बाद में तेलंगाना में मिला
- घटना के समय खुद को नागालैंड में ड्यूटी पर दिखाने की कोशिश की
अदालत ने ठोस सबूतों के आधार पर याचिका ठुकराई
सरकारी पक्ष की ओर से एडवोकेट नीरज जावडे ने मजबूत दलीलें पेश कीं। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद प्रमुख और ठोस साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
यह मामला न केवल प्रेम में धोखा और अपराध को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि फिल्मी तरीके अपनाकर कानून से बचना संभव नहीं है।

