दालों की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी
केंद्र सरकार ने दालों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ‘दाल आत्मनिर्भरता अभियान’ शुरू किया है। इस अभियान के तहत आगामी रबी सीजन में किसानों को तूर, उड़द और मसूर के प्रमाणित बीज 100 प्रतिशत सब्सिडी पर यानी मुफ्त उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
12 हजार रुपये तक के बीज मिलेंगे मुफ्त
सरकार ने 28 अगस्त 2026 को इस योजना के तहत प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। पात्र किसानों को 12 हजार रुपये तक के बीज 100 प्रतिशत अनुदान पर दिए जाएंगे। सरकार का दावा है कि किसानों को प्रमाणित बीज मिलने से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
नागपुर जिले में योजना को लेकर सवाल
नागपुर जिले में रबी सीजन में मुख्य रूप से चना और उसके बाद मटर की खेती की जाती है। वहीं तूर, मूंग और उड़द जैसी दालों की खेती मुख्य रूप से खरीफ सीजन में होती है। जिले में रबी सीजन में तूर की खेती नहीं होती और उड़द व मसूर का उत्पादन भी सीमित है। ऐसे में इस योजना का स्थानीय किसानों को कितना लाभ मिलेगा, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
प्रमाणित बीज मिलने से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद
अभियान के तहत किसानों को प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। हालांकि, किसानों का कहना है कि बाजार में कई कंपनियों के बीज उपलब्ध हैं, लेकिन प्रमाणित बीज की उपलब्धता सीमित रहती है। यदि प्रमाणित बीज के नाम पर गुणवत्ताहीन बीज उपलब्ध कराए गए, तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।
दालों के बढ़ते आयात से आत्मनिर्भरता पर जोर
देश में दालों का उत्पादन बढ़ाने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। कम बाजार भाव, बढ़ती उत्पादन लागत, प्रतिकूल मौसम, कीटों का प्रकोप और गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी के कारण किसानों का रुझान अन्य लाभकारी फसलों की ओर बढ़ा है। इससे दालों के उत्पादन में कमी और आयात पर निर्भरता बढ़ी है।
पुरानी और संकरित किस्मों को भी मिलेगा लाभ
सरकार के अनुसार, अभियान के तहत पुरानी किस्मों के साथ संकरित किस्मों के बीज के लिए भी अनुदान दिया जाएगा। हालांकि, किन पुरानी और संकरित किस्मों को योजना में शामिल किया गया है, यह स्पष्ट नहीं किया गया है।
कृषि विभाग से जानकारी लेने की अपील
किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए अपने क्षेत्र के कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क कर पात्रता, बीज वितरण और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी लेने की सलाह दी गई है।

