जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन को भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधे को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
सूरज श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जग बलहारी ॥
भक्तन की कामना, सदा पूर्ण करो माता।
जगत के पालनहार, तुम हो त्रिलोक पिता ॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
॥ दोहा ॥
गणपति आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे ॥
॥ अंतिम चौपाई ॥
श्री गणेश जी की आरती, जो कोई जन गावे।
चौंसठ योगिनी मंगल गावें, सुख-सम्पत्ति घर आवे ॥
ॐ गं गणपतये नमः
जय गणेश गिरीजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहति शिवानंद स्वामी, हर हु संकट भयवान ॥
हर हर महादेव! जय श्री गणेश जी!! 🙏🍊🪔

