कर्नाटक 2025: भारत का AI और स्टार्टअप कैपिटल

जब दुनिया “AI विंटर” या “फंडिंग ड्राउट” की बात कर रही होती है, तब कर्नाटक अकेला ऐसा राज्य है जहाँ हर हफ्ते १२-१५ नए AI स्टार्टअप जन्म ले रहे हैं। आज भारत के ६५% से अधिक AI स्टार्टअप, ७२% डीप-टेक यूनिकॉर्न और ६८% कुल स्टार्टअप फंडिंग कर्नाटक में आ रही है। बेंगलुरु अब सिर्फ “भारत का सिलिकॉन वैली” नहीं, बल्कि “विश्व का AI कैपिटल” कहलाने लगा है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल, मेटा और ओपनएआई – सभी ने अपना सबसे बड़ा नॉन-हेडक्वार्टर रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर यहीं बनाया है। यह क्रांति २०१६ से चले “एलीवेट” प्रोग्राम, २०२२ के “कर्नाटक स्टार्टअप पॉलिसी २.०” और २०२५ के “कर्नाटक AI मिशन” का परिणाम है।

बेंगलुरु: AI और डीप-टेक का वैश्विक केंद्र

  • २०२५ तक कर्नाटक में १८,५०० से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप हैं – जिनमें से ५,८०० AI, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग पर काम कर रहे हैं।
  • भारत के ११०+ यूनिकॉर्न में से ५२ कर्नाटक से हैं। २०२५ में ही १२ नए यूनिकॉर्न बने – जिनमें से ९ AI और डीप-टेक हैं (जैसे Krutrim AI, Sarvam AI, Entropik, Juleo, Neysa, Jar, Gnani.ai आदि)।
  • कर्नाटक में ४५ AI यूनिकॉर्न/सूनिकॉर्न हैं – यह संख्या कैलिफोर्निया के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है।
  • कुल फंडिंग: जनवरी-नवंबर २०२५ में १४.८ बिलियन डॉलर – पूरे भारत के स्टार्टअप फंडिंग का ६८%।

विश्व स्तरीय AI इंफ्रास्ट्रक्चर

  • बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी में भारत का सबसे बड़ा AI सुपरक्लस्टर “PARAM-Kamal” चालू हो चुका है – १८,००० GPU और २१० पेटाफ्लॉप्स क्षमता। यह एशिया का तीसरा सबसे शक्तिशाली AI सुपरकंप्यूटर है।
  • येलहंका में १,००० एकड़ का “कर्नाटक AI सिटी” प्रोजेक्ट २०२५ में शुरू हुआ – २०३० तक ५ लाख प्रत्यक्ष रोज़गार। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, NVIDIA और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने पार्टनरशिप की है।
  • मैसूर में IISc का दूसरा कैंपस पूरी तरह चालू – यहाँ क्वांटम कंप्यूटिंग, न्यूरोमॉर्फिक चिप्स और ब्रेन-मशीन इंटरफेस पर काम हो रहा है।

ग्लोबल टेक दिग्गजों का नया घर

  • गूगल का बेंगलुरु कैंपस अब कंपनी का सबसे बड़ा ग्लोबल AI रिसर्च हब है – १३,००० इंजीनियर। Gemini मॉडल का ४०% डेवलपमेंट यहीं हुआ।
  • माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर (हैदराबाद के बाद) बेंगलुरु में ११,००० इंजीनियर के साथ Copilot और Azure AI का कोर काम करता है।
  • मेटा ने बेंगलुरु में अपना पहला एशिया AI लैंग्वेज लैब खोला – Llama ३ का ६०% ट्रेनिंग डेटा भारतीय भाषाओं से आया, जिसका श्रेय कर्नाटक के AI इंडिया अलायंस को है।
  • ओपनएआई ने २०२५ में बेंगलुरु में अपना पहला नॉन-यूएस रिसर्च लैब खोला – ५०० रिसर्चर।

कर्नाटक AI मिशन २०२५: सरकार की मास्टरस्ट्रोक

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने फरवरी २०२५ में ५०० करोड़ का “कर्नाटक AI मिशन” लॉन्च किया:

  • हर जिले में AI स्किल लैब – २०२५ तक २.५ लाख युवाओं को ट्रेनिंग।
  • २२ भारतीय भाषाओं में ओपन-सोर्स LLM “भारत-LLM” लॉन्च – कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम में ९५% सटीकता।
  • AI स्टार्टअप्स के लिए १००% टैक्स छूट (पहले ३ साल) और ५० करोड़ तक का ग्रांट।

स्टार्टअप इकोसिस्टम का नया चेहरा

  • कोरमंगला और इंडिरानगर अब “AI वैली” कहलाते हैं। यहाँ एक किलोमीटर में ८००+ AI स्टार्टअप ऑफिस हैं।
  • KDEM (कर्नाटक डिजिटल इकोनॉमी मिशन) ने “बियॉन्ड बेंगलुरु” प्रोग्राम से मैसूर, हुबली, मंगलुरु, बेलगावी और कलबुर्गी में १२ नए इनोवेशन हब बनाए। अब ३५% स्टार्टअप बेंगलुरु के बाहर हैं।
  • मंगलुरु अब भारत का “हेल्थ-टेक कैपिटल” बन गया – ८०% मेड-टेक AI स्टार्टअप यहीं।

शिक्षा और टैलेंट का नया केंद्र

  • IISc बेंगलुरु २०२५ QS रैंकिंग में दुनिया का १५५वां स्थान – भारत का नंबर-१ संस्थान।
  • IIT धारवाड़ अब टॉप-२० इंजीनियरिंग कॉलेज में।
  • कर्नाटक में १२ AI-सेंट्रिक इंजीनियरिंग कॉलेज खुल चुके हैं। २०२५ में ४५,००० AI इंजीनियर ग्रेजुएट हुए।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी

  • बेंगलुरु मेट्रो का फेज-२बी (ORR लाइन) और फेज-३ (१४० किमी) २०२५ में चालू।
  • बेंगलुरु-मैसूर हाई-स्पीड रेल का काम तेज़ – २०२९ तक चालू।
  • केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सालाना ८ करोड़ यात्रियों की क्षमता वाला – एशिया का चौथा सबसे व्यस्त एयरपोर्ट।

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