नागपुर: शहर की ऐतिहासिक नाग नदी को प्रदूषण से मुक्त करने और उसका पुनर्जीवन करने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी परियोजना अब तक जमीन पर गति नहीं पकड़ पाई है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय से मंजूरी मिलने के तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद 1,926.99 करोड़ रुपये की नाग नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना अब भी टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी जांच और प्रशासनिक औपचारिकताओं में उलझी हुई है।
नागपुर की नाग नदी लंबे समय से प्रदूषण और गंदगी की समस्या से जूझ रही है। इस नदी को स्वच्छ बनाने के लिए बड़े स्तर पर सीवरेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशन बनाने की योजना तैयार की गई थी। लेकिन अब तक परियोजना के मुख्य निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई दे रही है।
1,926.99 करोड़ की परियोजना में क्या-क्या होना है?
नाग नदी के प्रदूषण को रोकने और नदी का पुनर्जीवन करने के लिए इस परियोजना के तहत बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे का निर्माण प्रस्तावित है।
परियोजना की प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं:
- 520 किलोमीटर लंबा सीवरेज नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
- तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाए जाएंगे।
- इन प्लांटों की कुल क्षमता प्रतिदिन 92 मिलियन लीटर (92 MLD) होगी।
- सात नए पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
- नदी में जाने वाले बिना उपचारित गंदे पानी को रोकने के लिए इंटरसेप्शन और डायवर्जन सिस्टम तैयार किया जाएगा।
इन व्यवस्थाओं का मुख्य उद्देश्य शहर के गंदे पानी को सीधे नाग नदी में जाने से रोकना और उसका उचित उपचार करना है।
केंद्र, राज्य और मनपा मिलकर उठाएंगे खर्च
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए केंद्र, महाराष्ट्र सरकार और नागपुर महानगरपालिका के बीच आर्थिक जिम्मेदारी तय की गई है।
- केंद्र सरकार: 60 प्रतिशत
- महाराष्ट्र सरकार: 25 प्रतिशत
- नागपुर महानगरपालिका (NMC): 15 प्रतिशत
इतने बड़े आर्थिक सहयोग के बावजूद परियोजना के मुख्य निर्माण कार्यों की धीमी गति पर सवाल उठ रहे हैं।
पांच पैकेज में बांटा गया प्रोजेक्ट, लेकिन काम की रफ्तार धीमी
नाग नदी पुनर्जीवन परियोजना को कुल पांच कॉन्ट्रैक्ट पैकेज (CP) में बांटा गया है। हालांकि, इन पैकेजों की मौजूदा स्थिति से पता चलता है कि प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद मुख्य निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
CP-1: 411.72 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण काम
इस पैकेज में नदी में जाने वाले गंदे पानी को रोकने और उसका मार्ग बदलने के लिए इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन का काम शामिल है। फिलहाल इस पैकेज में शुरुआती सर्वेक्षण, ड्रॉइंग और डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
CP-2: 415.79 करोड़ रुपये के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
इस पैकेज के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाना है। फिलहाल टेंडर से संबंधित प्रारूप दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
CP-3: 253.17 करोड़ रुपये का उत्तर क्षेत्र सीवरेज नेटवर्क
इस पैकेज के तहत उत्तर क्षेत्र में सीवरेज नेटवर्क तैयार किया जाएगा। तकनीकी जांच के बाद अब लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी करने की प्रक्रिया तक प्रगति हुई है।
CP-4: टेंडर प्रक्रिया में अटका काम
इस पैकेज का काम अभी टेंडर प्रक्रिया के चरण में है। इसके तहत प्रस्तावित कार्यों के क्रियान्वयन की दिशा में आगे की प्रक्रिया बाकी है।
CP-5: मोक्षधाम में विद्युत शवदाह गृह
इस पैकेज में मोक्षधाम स्थित विद्युत शवदाह गृह से संबंधित 1.32 करोड़ रुपये का गैर-सीवरेज कार्य शामिल है। फिलहाल परियोजना में सीमित कॉन्ट्रैक्ट गतिविधि इसी हिस्से में सामने आई है।
टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को जिम्मेदारी, फिर भी जमीन पर इंतजार
परियोजना को गति देने के लिए वर्ष 2024 के अंत में टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट नियुक्त किया गया था।
कंपनी को तकनीकी समन्वय, परियोजना प्रबंधन और कार्यान्वयन में सहायता की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उम्मीद थी कि इसके बाद परियोजना के निर्माण कार्य तेजी से शुरू होंगे।
हालांकि, मुख्य पैकेज अब भी अलग-अलग प्रशासनिक और टेंडर प्रक्रियाओं में होने के कारण परियोजना क्षेत्र में बड़े स्तर पर निर्माण गतिविधियां शुरू होने का इंतजार है।
8 साल की मंजूरी, लेकिन 5 साल में पूरा करने का लक्ष्य
नागपुर महानगरपालिका के कार्यकारी अभियंता राजेश डुफारे के अनुसार, परियोजना को पूरा करने के लिए स्वीकृत समयसीमा आठ वर्ष है। हालांकि, मनपा प्रशासन इसे तेजी से पूरा करने और पांच वर्षों के भीतर सभी कार्य समाप्त करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
राजेश डुफारे ने बताया कि फिलहाल प्रारंभिक सर्वेक्षण और टेंडर प्रक्रिया जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, CP-3 की तकनीकी जांच के बाद सीवरेज नेटवर्क और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े अन्य प्रमुख कार्य अगले वित्तीय वर्ष में शुरू होने की संभावना है।
नाग नदी की सफाई के लिए इंतजार कब होगा खत्म?
नाग नदी को प्रदूषण से मुक्त करने की यह परियोजना शहर के पर्यावरण और नागरिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लेकिन सीवरेज नेटवर्क, ट्रीटमेंट प्लांट और गंदे पानी को रोकने वाली व्यवस्थाओं के बिना नदी की सफाई का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल है।
परियोजना में हो रही देरी के कारण नदी में गंदे पानी का प्रवाह रोकने और पर्यावरण को सुधारने की योजना भी प्रभावित हो रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 1,926.99 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का वास्तविक निर्माण कार्य कब शुरू होगा? सरकार और मनपा की ओर से समयसीमा तय की गई है, लेकिन शहरवासियों को अभी भी नाग नदी के कायाकल्प का इंतजार है।
सिर्फ सरकारी मंजूरी, बजट और घोषणाओं से नाग नदी साफ नहीं होगी। जब तक सीवरेज नेटवर्क का निर्माण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना और गंदे पानी को नदी में जाने से रोकने का काम जमीन पर पूरा नहीं होता, तब तक नाग नदी का पुनर्जीवन केवल कागजों तक सीमित रहने का खतरा बना रहेगा।

