28 महीने में निवेश की रकम दोगुनी करने का दिया था लालच, चार निवेशकों को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने और फर्जी दस्तावेजों से संपत्ति बेचने का आरोप
नागपुर: नागपुर में रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़ा करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। रामदेव बाबा बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों और पदाधिकारियों के खिलाफ निवेशकों को रकम दोगुनी करने का लालच देकर कथित तौर पर धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, इस मामले में 12 करोड़ 20 लाख रुपये के निवेश का उल्लेख है। इसके अलावा, तीन अन्य लोगों की चल-अचल संपत्तियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें बेचने का भी आरोप लगाया गया है।
मामले में शिकायतकर्ता की पहचान अधिवक्ता जुगलकिशोर टिकमचंद गिल्डा (64), निवासी गोरेपेठ, धरमपेठ, नागपुर के रूप में हुई है। शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर बर्डी पुलिस ने कंपनी से जुड़े छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
28 महीने में रकम दोगुनी करने का दिया था लालच
शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने जुगलकिशोर गिल्डा को एक ऐसी निवेश योजना के बारे में बताया था, जिसमें निवेश की गई रकम को 28 महीने के भीतर दोगुना करने का वादा किया गया था। इस प्रस्ताव पर भरोसा करते हुए शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर 12 करोड़ 20 लाख रुपये का निवेश किया।
आरोप है कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जब शिकायतकर्ता ने अपनी रकम और वादे के मुताबिक लाभ वापस मांगा, तो आरोपियों ने भुगतान करने के बजाय रकम पर दोबारा दोगुना लाभ देने का प्रस्ताव रखा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरह उनकी रकम लौटाने से इनकार किया गया।
तीन अन्य निवेशकों की संपत्ति के फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप
मामले में केवल निवेश की रकम से जुड़ी कथित धोखाधड़ी ही नहीं, बल्कि तीन अन्य लोगों की संपत्तियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर संपत्तियों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उनके आधार पर संपत्तियां बेच दीं।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि संपत्ति संबंधी दस्तावेज कैसे तैयार किए गए, लेन-देन में किन लोगों की भूमिका रही और संबंधित संपत्तियों के स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड क्या हैं।
रामदेव बाबा बिल्डर्स से जुड़े छह लोगों के नाम
इस मामले में कंपनी और उसके संचालक मंडल से जुड़े जिन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- गोपाल हरीकिशन चांडक (42 वर्ष)
- मोहन हरीकिशन चांडक (38 वर्ष)
- शारदादेवी हरीकिशन चांडक (60 वर्ष)
- गणेश विठ्ठलदास चांडक (38 वर्ष)
- शिल्पा गोपाल चांडक
- सुजाता मोहन चांडक (39 वर्ष)
शिकायत में इन सभी को वर्धा जिले के आर्वी का निवासी बताया गया है। पुलिस मामले में प्रत्येक व्यक्ति की कथित भूमिका और कंपनी से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
2009 से 2026 के बीच की बताई गई घटना
शिकायत में कथित घटनाक्रम की अवधि 20 मई 2009 से 17 अक्टूबर 2026 के बीच बताई गई है। आरोप है कि निवेश योजना के माध्यम से रकम जुटाने और संपत्तियों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की घटनाएं इसी अवधि के दौरान हुईं।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच-पड़ताल के बाद रविवार को आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। मामले में निवेश से जुड़े दस्तावेजों, भुगतान के रिकॉर्ड और संपत्ति के लेन-देन की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बर्डी पुलिस ने शुरू की जांच
मामला दर्ज होने के बाद बर्डी पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि निवेश की रकम कहां इस्तेमाल की गई, क्या अन्य लोग भी कथित योजना से प्रभावित हुए और संपत्तियों के दस्तावेजों में कथित अनियमितताएं कैसे हुईं।
फिलहाल, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के तहत पुष्टि होना बाकी है। पुलिस जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

