पुलिस और CBI अधिकारी बनकर 75 वर्षीय सेवानिवृत्त नागरिक को बनाया निशाना; बेलतरोड़ी पुलिस ने दर्ज किया मामला
नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में साइबर अपराधियों ने पुलिस और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के अधिकारी होने का झूठा दावा कर एक 75 वर्षीय सेवानिवृत्त नागरिक से 8 लाख रुपये की ठगी की। आरोपियों ने बुजुर्ग को सेक्स रैकेट के मामले में फंसाने और गिरफ्तार करने की धमकी दी। साथ ही, उनकी पत्नी को भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाया। पीड़ित की शिकायत पर बेलतरोड़ी पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
माधव नंदेश्वर को फोन कर सेक्स रैकेट में फंसाने की धमकी
इस मामले में पीड़ित की पहचान माधव धोंडूजी नंदेश्वर के रूप में हुई है, जो बेलतरोड़ी क्षेत्र के निवासी और सेवानिवृत्त नागरिक हैं। जानकारी के अनुसार, उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को पुलिस और CBI का अधिकारी बताया।
आरोपियों ने नंदेश्वर पर सेक्स रैकेट से जुड़े मामले में शामिल होने का आरोप लगाया और उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दी। इस तरह उन्हें डराकर मानसिक दबाव में रखने की कोशिश की गई।
पत्नी को भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाया
साइबर अपराधियों ने बार-बार फोन कर नंदेश्वर और उनकी पत्नी की जांच चलने का झूठा दावा किया। आरोपियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वे गंभीर कानूनी कार्रवाई में फंस सकते हैं।
पत्नी को भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देकर दोनों को भयभीत किया गया। इस दबाव के कारण पीड़ित आरोपियों के निर्देशों का पालन करने लगे।
तेलंगाना के बैंक खाते में ट्रांसफर कराए 8 लाख रुपये
आरोपियों की धमकियों और मानसिक दबाव के चलते माधव नंदेश्वर ने तेलंगाना स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के खाते में ऑनलाइन 8 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ साइबर ठगी हुई है। इसके बाद उन्होंने बेलतरोड़ी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।
बेलतरोड़ी पुलिस ने दर्ज किया मामला
पीड़ित की शिकायत के आधार पर बेलतरोड़ी पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308, 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस आरोपियों की पहचान करने और ठगी की रकम से जुड़े बैंक खातों की जांच करने में जुटी है।
क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ और कैसे बचें?
‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। वे वीडियो कॉल या फोन के जरिए पीड़ित को लगातार निगरानी में होने का भ्रम पैदा करते हैं और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
ध्यान रखें: कोई भी वैध पुलिस या जांच एजेंसी फोन अथवा वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करके पैसे जमा करने का आदेश नहीं देती। ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं, पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत पुलिस को सूचना दें। साइबर वित्तीय ठगी होने पर 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

