सिर्सी में दूषित पानी की आपूर्ति से ग्रामीण परेशान, ग्राम पंचायत पर लापरवाही का आरोप

सिर्सी के तीन वार्डों में दूषित पानी की शिकायत

उमरेड तालुका स्थित सिर्सी गांव में ग्रामीणों को कथित तौर पर दूषित और गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। गांव के वार्ड क्रमांक 1, 2 और 3 के नागरिकों ने पानी की गुणवत्ता को लेकर जिला परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनायक महामुनी और विधायक संजय मेश्राम से शिकायत की है।

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6,140 की आबादी, 13 जलस्रोतों से होती है आपूर्ति

सिर्सी गांव की आबादी करीब 6,140 है और यहां कुल पांच वार्ड हैं। गांव में पानी वितरण के लिए 13 जलस्रोत हैं, जिनमें पांच नल योजनाएं और आठ सार्वजनिक कुएं शामिल हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन स्रोतों से मिलने वाला पानी कई स्थानों पर पीने योग्य नहीं है।

पानी के नमूने जांच में मिले दूषित

4 अगस्त को प्राथमिक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशिष सोनुने की रिपोर्ट में नल योजना पुनर्वास कुएं और यूको बैंक के पास स्थित हैंडपंप के पानी के नमूनों के दूषित पाए जाने का उल्लेख किया गया था। इसके बाद सात दिनों तक सुपर क्लोरीनेशन कर दोबारा पानी के नमूने जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए गए।

ग्राम पंचायत ने लापरवाही से किया इनकार

सिर्सी ग्राम पंचायत के सचिव तातोबा कुंड के अनुसार, गांव के सभी 13 जलस्रोतों के पानी के नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि पानी में ब्लिचिंग पाउडर और फिटकरी का उचित मात्रा में इस्तेमाल किया जा रहा है और किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद उचित निर्णय लेने की बात भी उन्होंने कही।

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ब्लिचिंग पाउडर के रखरखाव पर भी सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत ने लाखों रुपये का ब्लिचिंग पाउडर खरीदा, लेकिन उसका इस्तेमाल और भंडारण उचित तरीके से नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, ब्लिचिंग पाउडर को भी अस्वच्छ और दयनीय स्थिति में रखा गया है। उन्होंने पानी की गुणवत्ता की नागपुर स्थित प्रयोगशाला से तत्काल जांच कराने और आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

दो साल पहले बनी कुएं की योजना अब तक उपयोग में नहीं

वार्ड क्रमांक 1, 2 और 3 की पानी की समस्या दूर करने के लिए करीब दो वर्ष पहले कुएं का निर्माण किया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के बावजूद अब तक इस कुएं का उपयोग शुरू नहीं किया गया है। इसके चलते उन्हें मजबूरी में कथित रूप से गंदे और दूषित पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी

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ग्रामीण सचिन उमरेडकर ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से लोग फिटकरी और ब्लिचिंग पाउडर के भरोसे पानी पी रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की मांग करते हुए कहा कि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। अन्य ग्रामीणों मयूर दांदडे, निकेश रोडे, शुभम हेडाऊ, आयुष बहे, सचिन बावनकर और सचिन बेगडे ने भी प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

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