कोराडी : कोराडी पावर प्लांट में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने की मांग जोर पकड़ रही है। पावर प्लांट में 660 मेगावाट क्षमता की दो नई इकाइयों के निर्माण का काम जारी है। आरोप है कि निर्माण कार्य का लाभ स्थानीय युवाओं और ठेकेदारों के बजाय बाहरी लोगों को मिल रहा है।
बाहरी ठेकेदारों को काम देने का आरोप
प्लांट में निर्माण कार्य का ठेका बीएचईएल (BHEL) और टीकेआईएल (TKIL) कंपनियों को मिला है। आरोप है कि इन दोनों कंपनियों ने काम बाहरी ठेकेदारों को सौंप दिया है। इन ठेकेदारों द्वारा आगे बाहरी उपठेकेदारों को काम देकर कम मजदूरी पर दूसरे राज्यों से आए श्रमिकों से काम कराया जा रहा है।
स्थानीय बेरोजगार युवाओं की अनदेखी का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है, जबकि बाहरी श्रमिकों से कम मजदूरी पर काम कराया जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय ठेकेदारों को भी दरकिनार कर बाहरी उपठेकेदारों को कम दर पर काम दिए जाने की बात कही गई है।
स्थानीय लोगों में बढ़ रहा असंतोष
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पूरी व्यवस्था के कारण क्षेत्र में असंतोष बढ़ रहा है। शासन की नीति के अनुसार स्थानीय लोगों को 80 प्रतिशत रोजगार देना अनिवार्य होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और संबंधित कंपनियों द्वारा नियमों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
न्यूनतम मजदूरी के आधार पर रोजगार देने की मांग
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा, नागपुर जिला उपाध्यक्ष पन्नालाल रंगारी ने राजस्व मंत्री तथा पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को ज्ञापन सौंपकर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को पावर प्लांट में कार्यरत संविदा श्रमिकों को मिलने वाली न्यूनतम मजदूरी के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
स्थानीय ठेकेदारों को भी काम देने की मांग
ज्ञापन में स्थानीय ठेकेदारों को महाजेनको की निर्धारित दरों के अनुसार काम देने तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देकर उन्हें न्याय दिलाने की मांग की गई है।

