नागपुर: मां के निधन के बाद पारिवारिक परिस्थितियों के कारण 16 वर्षीय बालक का जीवन चार दीवारों में सिमट गया। वह करीब दो वर्षों तक न स्कूल जा सका, न दोस्तों से मिल सका और न ही दसवीं की परीक्षा दे सका। बेलतरोड़ी पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार बालक को घर से सुरक्षित निकालकर बालगृह में दाखिल कराया गया है।
मां के निधन के बाद बदली पिता की स्थिति
प्राथमिक जांच में सामने आया कि मां के निधन के बाद बालक के पिता के व्यवहार और मानसिक स्थिति में बदलाव आया। पिता बालक को घर से बाहर जाने और स्कूल जाने की अनुमति नहीं देते थे। परिणामस्वरूप उसका शिक्षण पूरी तरह बंद हो गया और वह सामान्य सामाजिक जीवन से भी दूर हो गया।
चाइल्ड हेल्पलाइन को मिली सूचना
बालक के घर में रहने और शिक्षा से दूर होने की जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को मिली। सूचना मिलते ही हेल्पलाइन की टीम ने बेलतरोड़ी पुलिस के सहयोग से संबंधित घर का दौरा किया।
मानसिक तनाव में मिला बालक
गृहभेंट के दौरान बालक की स्थिति देखकर टीम को चिंता हुई। वह बहुत कम बोल रहा था और मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं तनावग्रस्त दिखाई दे रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि करीब दो वर्षों से वह स्कूल, पढ़ाई और अपने मित्रों से पूरी तरह दूर था। इस दौरान उसकी दसवीं की परीक्षा भी छूट गई।
पुलिस की मदद से बालक का रेस्क्यू
बालक की उम्र, शिक्षा से लंबे समय से दूरी, पारिवारिक परिस्थितियों तथा उसकी मानसिक और शारीरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम ने पुलिस की सहायता से बालक को तत्काल सुरक्षित रूप से घर से बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद उसकी चिकित्सकीय जांच कराई गई और सुरक्षा की दृष्टि से उसे बालगृह में दाखिल कराया गया।
बालगृह में परामर्श और चिकित्सा देखरेख
बालगृह में बालक को आवश्यक समुपदेशन, चिकित्सा देखरेख और मानसिक सहयोग दिया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर मनोचिकित्सक से भी उसकी जांच कराई जाएगी। अब सबसे बड़ी चुनौती बालक के दो वर्षों से छूटे हुए समय की भरपाई कर उसे दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
अधिकारियों और चाइल्ड हेल्पलाइन टीम की महत्वपूर्ण भूमिका
यह कार्रवाई जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुनील मेसरे के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रवींद्र नाईकवाड़, जिला बाल संरक्षण अधिकारी मुस्ताक पठाण, चाइल्ड हेल्पलाइन जिला समन्वयक अनिकेत भिवगड़े और केस वर्कर मीनाक्षी धडाड़े ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

