नागपुर: इंदिरा गांधी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेयो) ने बाल श्रवण उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के कान-नाक-गला (ईएनटी) विभाग ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत 22 माह की बच्ची का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट किया है। आरबीएसके योजना के अंतर्गत दो वर्ष से कम आयु के बच्चे पर की गई यह विभाग की पहली सफल सर्जरी है।
जन्मजात श्रवण दोष से पीड़ित थी बच्ची
जानकारी के अनुसार, नागपुर निवासी 22 माह की बच्ची जन्म से ही श्रवण दोष से पीड़ित थी। मेयो अस्पताल में आवश्यक जांच के बाद जिला शल्य चिकित्सक डॉ. निवृत्ति राठोड़ की पहल पर बच्ची का इस योजना के तहत पंजीकरण किया गया।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक की सर्जरी
यह जटिल सर्जरी ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. जीवन वेदी के नेतृत्व में डॉ. रितेश शेळकर तथा रेजिडेंट डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न की। इस दौरान भूल विशेषज्ञ डॉ. वी. शेलगावकर और डॉ. प्रियल शेळकर ने सहयोग किया, जबकि ऑडियोलॉजिस्ट मृगा वैद्य ने तकनीकी सहायता प्रदान की। सर्जरी के बाद बच्ची के स्पीच एवं भाषा पुनर्वास की जिम्मेदारी इशिता मांडविया संभाल रही हैं। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नितीन शेंडे ने भी आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया।
अब तक 125 बच्चों का हो चुका है कॉक्लियर इम्प्लांट
मेयो अस्पताल में इससे पहले महात्मा ज्योतिबा फुले जनआरोग्य योजना और एडीआईपी योजना के तहत लगभग 125 बच्चों एवं मरीजों का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट किया जा चुका है। अब आरबीएसके योजना के जुड़ने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी यह अत्याधुनिक उपचार निःशुल्क उपलब्ध हो सकेगा।
समय पर इलाज से बदल सकती है बच्चे की जिंदगी
ईएनटी विभाग के प्रमुख डॉ. जीवन वेदी ने कहा कि जन्मजात श्रवण दोष का समय पर उपचार बेहद आवश्यक होता है। कम उम्र में कॉक्लियर इम्प्लांट होने से बच्चे का भाषा विकास, मानसिक विकास और शैक्षणिक प्रगति सामान्य रूप से हो सकती है।
जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाई जाएगी सुविधा
मेयो के अधिष्ठाता डॉ. रवी चव्हाण ने कहा कि मेयो अस्पताल लंबे समय से विदर्भ के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। अब आरबीएसके योजना के तहत कॉक्लियर इम्प्लांट जैसी उन्नत सर्जरी शुरू होने से जरूरतमंद बच्चों को बड़ा लाभ मिलेगा और उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी।

