नागपुर: शहर के एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती छह माह की गर्भवती प्रियंका मनीष पोटदुखे (निवासी बिडीपेठ) तथा उनके गर्भस्थ शिशु की मौत से सनसनी फैल गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। रविवार को हुई इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में कराया गया भर्ती
परिजनों के अनुसार, शनिवार तड़के करीब 3 बजे प्रियंका पोटदुखे को पेट में तेज दर्द होने पर म्हालगी नगर चौक स्थित सुखकर्ता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह छह माह की गर्भवती थीं। उपचार के दौरान रविवार दोपहर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।
‘इलाज में देरी के कारण हुई मौत’ – परिजनों का आरोप
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन को पहले से ही गर्भस्थ शिशु के विकास में समस्या होने की जानकारी थी। इसके बावजूद समय पर आवश्यक उपचार करने के बजाय केवल आश्वासन देकर मामला टालने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि समय पर उचित चिकित्सा नहीं मिलने के कारण ही मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की मौत हुई।
‘अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था’
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय अस्पताल में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं था और केवल नर्सें ही मरीजों की देखभाल कर रही थीं। मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद समय रहते उचित इलाज नहीं किया गया।
मौत के बाद दूसरे अस्पताल भेजने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि प्रियंका पोटदुखे की मौत के बाद जिम्मेदारी से बचने के लिए सुखकर्ता अस्पताल प्रशासन ने उन्हें दिघोरी स्थित यश अस्पताल भेज दिया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का हंगामा, पुलिस ने संभाली स्थिति
घटना से आक्रोशित परिजन मृतका का शव दोबारा सुखकर्ता अस्पताल लेकर पहुंचे और अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा। सूचना मिलने पर हुडकेश्वर पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित लोगों को शांत कराया।
जांच के बाद कानूनी कार्रवाई का आश्वासन
पुलिस ने परिजनों की शिकायत दर्ज कर उन्हें आश्वस्त किया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

