भविष्य के लिए नई रणनीति जरूरी: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एक दिन में 15 दिनों जितनी बारिश चिंताजनक

नागपुर में मंगलवार को हुई रिकॉर्डतोड़ बारिश को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एक ही दिन में 15 दिनों के बराबर बारिश होना सामान्य घटना नहीं है और ऐसा मौसम पैटर्न राज्य के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिल रहा है। ऐसे बदलते हालात को देखते हुए भविष्य की योजना और जल निकासी व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करना आवश्यक हो गया है।

नागपुर में डेढ़ घंटे में हुई 110 मिमी बारिश

  • Save

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि नागपुर में 24 घंटे के दौरान 184 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिसमें से 110 मिमी बारिश केवल सवा घंटे के भीतर हुई। उन्होंने कहा कि इतनी कम अवधि में इतनी अधिक बारिश होना बेहद चिंताजनक है और यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की ओर संकेत करता है।

भारी बारिश से सखल इलाकों में भरा पानी, जनजीवन प्रभावित

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश के कारण शहर के कई निचले इलाकों में पानी भर गया, जिससे कुछ समय के लिए जनजीवन प्रभावित हुआ। उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर विकास कार्य जारी होने के कारण भी पानी की निकासी प्रभावित हुई, हालांकि पूरे शहर की स्थिति ऐसी नहीं थी।

मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम इतनी भारी बारिश के लिए पर्याप्त नहीं

देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि सामान्यतः जल निकासी प्रणाली पिछले 20 से 25 वर्षों के वर्षा आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाती है और उसमें अधिकतम अनुमानित वर्षा से लगभग 10 प्रतिशत अतिरिक्त क्षमता रखी जाती है। लेकिन जब इतनी अधिक मात्रा में बारिश एक साथ होती है तो प्राकृतिक और तकनीकी दोनों प्रणालियां प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पातीं।

  • Save

राहुल गांधी पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस दौरान राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके पास राहुल गांधी के भाषण सुनने का समय नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश के युवाओं के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस बात नहीं करते और केवल निराधार आरोप लगाने का काम करते हैं। उनके अनुसार, अराजकता फैलाना ही उनका एजेंडा है और उन्हें देशहित से कोई सरोकार नहीं है।

फसल बीमा में सुधार के बाद घटी किसानों की संख्या

मुख्यमंत्री ने पीक (फसल) बीमा योजना पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पहले एक रुपये में फसल बीमा उपलब्ध कराया गया था, लेकिन इसमें बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया। इसके बाद सरकार ने योजना में सुधार किए हैं और अब किसानों को पहले की तरह अपना अंशदान देना पड़ता है। इसी कारण फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में कमी देखने को मिल रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link