नागपुर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का बड़ा साइबर फ्रॉड, रिटायर्ड इंजीनियर से 87 लाख रुपये की ठगी

नागपुर: शहर में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर एक रिटायर्ड इंजीनियर को एक महीने तक मानसिक रूप से बंधक बनाकर 87 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। इस मामले में पुलिस ने साइबर अपराध के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है

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‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर रची गई साजिश

  • आरोपियों ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया
  • उन्हें बताया गया कि वे गंभीर मामले में फंसे हैं और जांच चल रही है
  • इसी बहाने उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया और बाहर किसी से संपर्क न करने की हिदायत दी गई

एक महीने तक मानसिक दबाव में रखा गया

  • पीड़ित को लगातार कॉल और वीडियो कॉल के जरिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया
  • उन्हें डराया गया कि अगर उन्होंने निर्देश नहीं माने तो कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी हो सकती है
  • इस दौरान आरोपी उनकी हर गतिविधि पर नजर रखते रहे
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87 लाख रुपये की बड़ी ठगी

  • डर और दबाव में आकर पीड़ित ने अलग-अलग खातों में कुल 87 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए
  • पैसे भेजने के बाद भी जब दबाव जारी रहा, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ

पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी

  • शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में साइबर फ्रॉड का केस दर्ज किया
  • पुलिस अब बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है

साइबर अपराध से बचाव के लिए पुलिस की अपील

  • पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि
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  • कोई भी सरकारी एजेंसी ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी प्रक्रिया नहीं अपनाती
  • किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या वीडियो कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी और पैसे साझा न करें
  • ऐसे मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करें

यह घटना एक बार फिर साइबर ठगों के नए-नए तरीकों की ओर इशारा करती है, जहां डर और तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को बड़ी ठगी का शिकार बनाया जा रहा है।

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