वासनकर निवेश घोटाला: आर्थिक अपराध शाखा पर पक्षपात के गंभीर आरोप, निवेशकों को नहीं मिला न्याय

नागपुर में सामने आए वासनकर इन्वेस्टमेंट घोटाले ने एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 300 करोड़ रुपये के इस बड़े आर्थिक घोटाले में अब तक निवेशकों को कोई ठोस राहत नहीं मिल पाई है, जबकि आर्थिक अपराध शाखा (EOW) पर गंभीर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं।

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300 करोड़ के घोटाले में महज 12 करोड़ की वसूली

इस बहुचर्चित घोटाले में अब तक:

  • कुल 300 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी सामने आई
  • लेकिन जांच एजेंसियां केवल 12 करोड़ रुपये की वसूली ही कर सकी हैं

यह आंकड़ा साफ तौर पर जांच की धीमी और कमजोर प्रगति को दर्शाता है, जिससे निवेशकों में भारी नाराजगी है।

निवेशकों का आरोप: असली आरोपियों को बचाया जा रहा

पीड़ित निवेशक सुधीर दुरुगकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि:

  • जांच एजेंसी ने बड़े लाभार्थियों को बचाने की कोशिश की
  • कई आरोपियों को बिना ठोस आधार के ‘क्लीन चिट’ दी गई
  • करोड़ों रुपये हड़पने वाले मुख्य लाभार्थियों को आरोपी तक नहीं बनाया गया

इन आरोपों ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।

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उच्च न्यायालय से सुप्रीम कोर्ट तक गुमराह करने के आरोप

निवेशकों का यह भी कहना है कि आरोपी:

  • उच्च न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गुमराह कर रहे हैं
  • बड़े-बड़े नामी वकीलों की मदद से कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है
  • इस बीच सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ उठाया जा रहा है

जांच में पारदर्शिता पर उठे सवाल

आर्थिक अपराध शाखा की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं:

  • केवल चयनित लोगों को ही गवाह बनाया गया
  • सभी पीड़ितों के बयान दर्ज नहीं किए गए
  • जांच में पारदर्शिता की कमी स्पष्ट दिखाई दे रही है
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पीड़ितों से एकजुट होकर शिकायत करने की अपील

निवेशक सुधीर दुरुगकर ने सभी पीड़ितों से अपील की है कि:

  • वे एकजुट होकर आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराएं
  • ताकि मामले में निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित हो सके

वासनकर निवेश घोटाले ने न सिर्फ निवेशकों की आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पीड़ितों को न्याय मिलेगा या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह अधूरा रह जाएगा।

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