नागपुर जिले के कामठी की रहने वाली आईटीबीपी की महिला जवान पायल डांगे ने अपने साहस से पूरे देश में शहर का नाम रोशन किया है। पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान अद्भुत बहादुरी दिखाने पर उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह के हाथों सम्मानित किया गया।
राज्यपाल के हाथों विशेष सम्मान
उत्तराखंड के नैनीताल स्थित ‘लोकभवन’ में आयोजित भव्य समारोह में पायल डांगे को प्रशस्ति पत्र, नकद पुरस्कार और ‘गुड एंट्री’ देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए दिया गया।
दंगों के बीच दिखाई अद्भुत बहादुरी
पश्चिम बंगाल में चुनाव ड्यूटी के दौरान पायल की तैनाती कोलकाता के पास मुरादाबाद क्षेत्र में की गई थी। मतदान के दिन वहां हिंसक दंगे भड़क उठे, जहां उपद्रवियों ने एक वरिष्ठ अधिकारी को चारों तरफ से घेर लिया था।
वरिष्ठ अधिकारी की जान बचाई
उस समय ‘क्यूआरटी गनमैन’ के रूप में तैनात पायल डांगे ने बिना समय गंवाए दंगाइयों के बीच घुसकर अपने वरिष्ठ अधिकारी को सुरक्षित बाहर निकाला। उनके इस साहसिक कदम ने एक बड़ी घटना को टाल दिया।
ईवीएम मशीन की भी की सुरक्षा
इतना ही नहीं, जब उपद्रवी भीड़ मतदान केंद्र में रखी ईवीएम मशीनों की ओर बढ़ी, तब पायल ने खुद को ढाल बनाकर उन्हें रोका और ईवीएम मशीन को सुरक्षित रखा। उनके इस कार्य की हर स्तर पर सराहना हो रही है।
परिवार की मेहनत का परिणाम
पायल डांगे कामठी के गौतम नगर की निवासी हैं। उनके पिता गणेश डांगे (वेकोली से सेवानिवृत्त) और माता विद्या डांगे (गृहिणी) ने अपनी चारों बेटियों को उच्च शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाया। उनकी बहनें भी विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
देशसेवा के प्रति समर्पण
पायल ने वर्ष 2014 में आईटीबीपी की परीक्षा पास की और चंडीगढ़ में 13 महीने का कठिन प्रशिक्षण पूरा किया। उनकी पहली पोस्टिंग लेह-लद्दाख में हुई थी। खास बात यह है कि उनके पति भी बीएसएफ में देशसेवा कर रहे हैं।
पूरे विदर्भ में गर्व और सम्मान
कामठी की इस बहादुर बेटी की उपलब्धि पर पूरे विदर्भ क्षेत्र में गर्व का माहौल है। पायल डांगे ने यह साबित कर दिया है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं और देशसेवा में उनका योगदान अतुलनीय है।

