नागपुर तीसरा रिंग रोड परियोजना पर बढ़ा विवाद: मुआवजे को लेकर किसानों में आक्रोश, संघर्ष तेज करने का ऐलान

नागपुर में प्रस्तावित तीसरे रिंग रोड प्रोजेक्ट को लेकर अब किसानों में असंतोष तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक ओर एनएमआरडीए (नागपुर महानगर विकास प्राधिकरण) और राज्य सरकार इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित किसान अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं।

  • Save

मुआवजे को लेकर स्पष्टता नहीं, किसानों में बढ़ी चिंता

तीसरे रिंग रोड के लिए प्रशासन द्वारा ड्रोन मैपिंग और भूमि चिह्नांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी, उन्हें कितना और किस आधार पर मुआवजा मिलेगा, इस बारे में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
इसी वजह से किसानों में असुरक्षा और आक्रोश दोनों बढ़ते जा रहे हैं।

148 किलोमीटर लंबा और 13,748 करोड़ का प्रोजेक्ट

यह प्रस्तावित रिंग रोड लगभग 148 किलोमीटर लंबा और 120 मीटर चौड़ा होगा, जिस पर करीब 13,748 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
यह सड़क समृद्धि महामार्ग समेत 8 प्रमुख हाईवे को जोड़ेगी और नागपुर जिले के 9 तालुकों के 107 गांवों से होकर गुजरेगी।
परियोजना के लिए लगभग 1617.18 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी।

  • Save

किसानों ने बनाई ‘शेतकरी संघर्ष सेना’

अपने हक के लिए लड़ाई को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रभावित किसानों ने बेल्लोरी (बाभूलखेड़ा) में बैठक आयोजित की।
इस बैठक में ‘शेतकरी संघर्ष सेना’ के गठन का निर्णय लिया गया, जिसमें प्रत्येक गांव से दो जागरूक प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।
किसानों ने यह भी तय किया कि वे इस लड़ाई को कानूनी और सड़क दोनों स्तरों पर आक्रामक तरीके से लड़ेंगे

थेट खरीद नीति पर भी उठे सवाल

राज्य सरकार की 12 मई 2015 की थेट जमीन खरीद नीति के तहत किसानों की सहमति से जमीन खरीदने का प्रस्ताव है।
लेकिन किसानों का सवाल है कि:

  • क्या हर किसान से अलग-अलग दर पर बातचीत होगी?
  • या सभी को एक समान मुआवजा मिलेगा?
    इस मुद्दे पर भी अब तक कोई स्पष्ट दिशा नहीं दी गई है।
  • Save

कम रेडीरेकनर दर से किसानों को नुकसान की आशंका

2014 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में रेडीरेकनर दर के पांच गुना तक मुआवजा दिया जाता है।
लेकिन जिन क्षेत्रों से रिंग रोड गुजर रहा है, वहां रेडीरेकनर दर काफी कम है।
ऐसे में किसानों को डर है कि:

  • उनकी जीवनभर की आय का साधन छिन जाएगा
  • और बदले में पर्याप्त आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा

परियोजना तय, लेकिन मुआवजा अब भी बड़ा सवाल

किसानों का कहना है कि अब तक के अनुभव के अनुसार सरकार किसी भी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहित कर ही लेती है।
तीसरे रिंग रोड की फाइलों की तेजी से हो रही मंजूरी को देखते हुए यह परियोजना लगभग तय मानी जा रही है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—
किसानों को उनकी जमीन के बदले आखिर मिलेगा क्या?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link