नागपुर को भिक्षामुक्त और बालमैत्री शहर बनाने की पहल तेज
नागपुर शहर को भिक्षामुक्त और बालमैत्री शहर बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘मिशन मुक्ती-3’ अभियान को अब बड़ी गति मिल रही है। शहर पुलिस, महानगरपालिका और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से लगातार रेस्क्यू, उपचार और पुनर्वसन का काम किया जा रहा है।
अभियान के तहत केवल दो दिनों में कुल 78 भिक्षुक, निराश्रित लोगों और बच्चों को सड़कों से सुरक्षित रेस्क्यू कर पुनर्वसन प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
पहले दिन 29 और दूसरे दिन 49 लोगों का रेस्क्यू
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार:
- पहले दिन 29 लोगों का रेस्क्यू किया गया
- दूसरे दिन 49 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
दूसरे दिन रेस्क्यू किए गए लोगों में:
- 16 पुरुष
- 19 महिलाएं
- 14 बच्चे
शामिल थे।
पुलिस आयुक्त डॉ. रविंद्र सिंगल के मार्गदर्शन में अभियान
यह विशेष अभियान पुलिस आयुक्त डॉ. रविंद्र सिंगल के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है। सक्करदरा और इमामवाड़ा पुलिस स्टेशन की संयुक्त टीम ने राजा बक्षा मंदिर, छोटा ताजबाग और बड़ा ताजबाग इलाके में विशेष कार्रवाई की।
अभियान में:
- महानगरपालिका संचालित भिक्षुक निवारण गृह
- सह्याद्री फाउंडेशन
- दिव्यवंदना आधार फाउंडेशन
- अन्य संबंधित विभाग
ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
रेस्क्यू किए गए लोगों को अलग-अलग आश्रय केंद्रों में भेजा गया
रेस्क्यू किए गए नागरिकों को उनकी जरूरत के अनुसार विभिन्न पुनर्वसन और आश्रय केंद्रों में भेजा गया है।
- मनपा आस्था भिक्षुक पुनर्वसन निवारागृह में 6 लोगों को रखा गया
- मनपा शांति सदन महिला निवारागृह में 6 महिलाओं की व्यवस्था की गई
- सरकारी बालगृह, काटोल रोड में 19 बच्चों को भेजा गया
- दिव्यवंदना आधार फाउंडेशन को 4 लोगों की जिम्मेदारी सौंपी गई
14 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया
जिन लोगों को तत्काल उपचार की जरूरत थी, उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुल 14 लोगों का इलाज जारी है।
बच्चों की काउंसलिंग और परिवार तलाशने की प्रक्रिया शुरू
रेस्क्यू किए गए बच्चों की:
- मेडिकल जांच
- काउंसलिंग
- परिवार की तलाश
जैसी प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं।
प्रशासन की नागरिकों से अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि:
सड़क पर भीख देकर भिक्षावृत्ति को बढ़ावा न दें।
यदि कोई जरूरतमंद व्यक्ति दिखाई दे, तो उसकी जानकारी प्रशासन या बाल संरक्षण विभाग को दें, ताकि उन्हें सुरक्षित पुनर्वसन और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

