नागपुर : शहर को गर्मी से राहत देने और सड़कों पर हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘ग्रीन शेड प्रोजेक्ट’ अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। प्रोजेक्ट में लगातार हो रही देरी, डिजाइन की खामियां और हाल ही में आए तूफान में हुए नुकसान ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गर्मी से राहत के लिए शुरू किया गया था प्रोजेक्ट
नागपुर महानगरपालिका की ओर से इस प्रोजेक्ट की शुरुआत शहर की प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर हरित छाया तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी। योजना के तहत लोहे की संरचनाओं पर बेल और पौधे लगाकर प्राकृतिक शेड तैयार किया जाना था, ताकि लोगों को तेज धूप से राहत मिल सके।
समय पर पूरा नहीं हो सका काम
प्रोजेक्ट की घोषणा बड़े स्तर पर की गई थी, लेकिन कई इलाकों में अब तक काम अधूरा पड़ा है। कई जगहों पर केवल लोहे के ढांचे लगाए गए हैं, जबकि पौधारोपण और रखरखाव का काम शुरू ही नहीं हुआ। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद प्रोजेक्ट का फायदा जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा।
तूफान में क्षतिग्रस्त हुई संरचनाएं
हाल ही में आए तेज आंधी-तूफान में कई जगहों पर लगाए गए ग्रीन शेड ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ लोहे की संरचनाएं झुक गईं, जबकि कुछ हिस्सों में निर्माण सामग्री सड़क पर गिरने से लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई
डिजाइन और गुणवत्ता पर उठे सवाल
शहरी योजनाकारों और नागरिक संगठनों ने प्रोजेक्ट के डिजाइन और गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि संरचनाएं मौसम के अनुसार मजबूत नहीं बनाई गईं और कई स्थानों पर योजना का क्रियान्वयन बिना उचित अध्ययन के किया गया।
विपक्ष ने मांगी जांच
मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी नगर प्रशासन पर निशाना साधा है। उन्होंने प्रोजेक्ट की लागत, निर्माण गुणवत्ता और देरी की जांच की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि जनता के पैसे का सही उपयोग नहीं किया गया।
मनपा ने दी सफाई
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कुछ काम मौसम और तकनीकी कारणों से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने दावा किया है कि क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत जल्द की जाएगी और प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

