नाबालिग बेटे को दोपहिया वाहन चलाने के लिए देना एक पिता को महंगा पड़ गया। मोटर वाहन न्यायालय ने मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित पिता पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही वाहन की रजिस्ट्रेशन 12 महीने के लिए रद्द कर दी गई है।
16 वर्षीय लड़का वाहन चलाते पकड़ा गया
मामला हसनबाग चौक क्षेत्र का है, जहां 52 वर्षीय व्यक्ति का 16 साल का बेटा दोपहिया वाहन चलाते हुए पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि वाहन नाबालिग को चलाने के लिए दिया गया था, जिसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा।
पिता पर सख्त कार्रवाई
मोटर वाहन न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी पिता पर 30 हजार रुपये का दंड लगाया। अदालत ने साफ संदेश दिया कि नाबालिगों को वाहन सौंपना कानूनन अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
12 महीने के लिए वाहन रजिस्ट्रेशन रद्द
न्यायालय ने केवल आर्थिक दंड ही नहीं लगाया, बल्कि संबंधित वाहन की नोंदणी यानी रजिस्ट्रेशन 12 महीनों के लिए रद्द करने का आदेश भी दिया। इससे साफ है कि प्रशासन अब नाबालिग ड्राइविंग के मामलों में बेहद कठोर रुख अपना रहा है।
नाबालिग को 25 साल की उम्र तक लाइसेंस नहीं
अदालत ने संबंधित नाबालिग लड़के को 25 वर्ष की उम्र पूरी होने तक ड्राइविंग लाइसेंस जारी न करने के निर्देश भी दिए हैं। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए नजीर के तौर पर देखा जा रहा है।
कानून तोड़ने वालों के लिए सख्त संदेश
यह मामला उन अभिभावकों के लिए कड़ा चेतावनी संदेश है, जो बच्चों के दबाव या लापरवाही में उन्हें वाहन चलाने देते हैं। नाबालिग के हाथ में वाहन देना सिर्फ जोखिम नहीं, बल्कि गंभीर कानूनी अपराध भी है।

