महाराष्ट्र के बजट सत्र के दौरान उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने विधान परिषद में महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण योजना की घोषणा की है। उन्होंने ‘लवकर या लवकर जा’ योजना शुरू करने का ऐलान किया, जिसका उद्देश्य खास तौर पर कामकाजी महिलाओं को सुविधा और सुरक्षा देना है।
उपमुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार विधान परिषद में बोलते हुए उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा, कामकाजी परिस्थितियों और सरकारी योजनाओं को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं।
महिलाओं के लिए ‘लवकर या लवकर जा’ योजना
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने बताया कि मुंबई महानगर क्षेत्र में कार्यरत सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
इस योजना के तहत महिला कर्मचारी सुबह 9:15 से 9:45 के बीच कार्यालय में जल्दी आकर काम शुरू कर सकती हैं, और इसके बदले उन्हें शाम को लगभग 30 मिनट पहले कार्यालय से निकलने की अनुमति मिलेगी।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पीक आवर्स की भीड़ से महिलाओं को राहत देना और उनकी सुरक्षा बढ़ाना है।
गायब महिलाओं और बच्चों के मामले पर सरकार की कार्रवाई
विधान परिषद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं और बच्चों के गायब होने के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
सरकार की ओर से ‘ऑपरेशन मुस्कान’ जैसे अभियानों के माध्यम से अब तक 42,594 बच्चों को खोजा जा चुका है।
इसके अलावा विशेष अभियानों के जरिए 5,066 महिलाओं और 2,771 बच्चों का भी पता लगाया गया है।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए अन्य कदम
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
- प्रमुख रेलवे स्टेशनों जैसे CSMT, चर्चगेट और बोरीवली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।
- बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर CCTV सिस्टम लगाया गया है।
- महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए ‘भरोसा सेल’ भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार की योजनाएं
सरकार की ओर से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- लाडकी बहीण योजना
- नमो भारत सशक्तिकरण योजना
- लेक लाडकी योजना
- अन्नपूर्णा योजना
- लखपती दीदी योजना
सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

