हिंदू समाधि स्थल से मुस्लिम व्यक्ति के शव का दफ़नाने के बाद उत्खनन का निर्देश

नागपुर: बंबई उच्च न्यायालय (नागपुर खंड) ने एक मुस्लिम व्यक्ति के शव का उत्खनन (exhumation) करने का आदेश दिया है, जिसे गलती से हिंदू समाधि स्थल (Mokshdham Ghat) पर दफना दिया गया था। कोर्ट ने यह फैसला आधिकारिक अधिकारियों द्वारा अनुमति न देने पर दायर याचिका पर सुनाया है।

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मामले का पूरा विवरण

1. मृतक का विवरण और घटना

  • मृतक का नाम साजिद खान था, जो मलेगांव का रहने वाला था।
  • वह 25 जनवरी को नागपुर आया था और 26 जनवरी की सुबह एक रेल दुर्घटना में हादसे का शिकार हो गया।
  • मृतक की पहचान तुरंत नहीं हो पाई, जिस कारण पुलिस ने उसे हिंदू समाधि स्थल पर दफना दिया

परिवार की याचिका और कोर्ट का आदेश

2. पहचान के बाद परिवार की मांग

  • मृतक के भाई जावेद खान ने पुलिस द्वारा दिखाई गई तस्वीरों के माध्यम से अपने भाई की पहचान की।
  • उन्होंने शव को मुक्त कब्रिस्तान (बड़ा ताजबाग) में इस्लामिक रिवाज़ों के अनुसार दफनाने के लिए आवेदन किया, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी।

3. उच्च न्यायालय के निर्देश

  • नागपुर बेंच के जस्टिस अनिल किलोर और राज वाकोड़े की पीठ ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 (गौरव और मानवीय अधिकार) मृत्य के बाद भी लागू होता है।
  • कोर्ट ने माना कि धर्म की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) के कारण उचित धार्मिक संस्कार करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
  • अदालत ने पहले किये गये प्रशासनिक इनकार को गलत और अनुचित बताया और निर्देश दिया कि शव का उत्खनन कानूनन निगरानी में किया जाये
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प्रमुख आदेश

4. न्यायालय ने स्पष्ट किया:

  • प्रशासन द्वारा पूर्व में अनुमति न देने के निर्णय को रद्द किया गया।
  • नगर निगम प्रशासन और स्थानीय पुलिस को बॉडी का उत्खनन कर परिवार को सौंपने का निर्देश दिया गया।
  • परिवार को दफनाने के लिए इस्लामी रिवाज़ अनुसार अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी गयी
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निष्कर्ष

यह निर्णय मानवीय गरिमा, धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के मूल अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृत्यु के बाद भी व्यक्ति की गरिमा बनी रहनी चाहिए।

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