नागपुर || विश्वभर में करोड़ों अनुयायियों की आस्था का केंद्र रही नागपुर की पावन दीक्षाभूमि अब सिंगापुर और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों की तर्ज पर विकसित की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने के लिए नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) ने सर्वांगीण विकास योजना तैयार करने हेतु प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (पीएमसी) नियुक्त करने का निर्णय लिया है।
एनएमआरडीए द्वारा विशेषज्ञ एजेंसियों से निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। डिजाइन को अंतिम रूप दिए जाने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन के लिए वैश्विक स्तर पर टेंडर जारी किया जाएगा। इच्छुक कंपनियां 26 फरवरी दोपहर 2 बजे तक अपनी निविदाएं जमा कर सकेंगी, जबकि 27 फरवरी को इन्हें खोला जाएगा।
न्यायालय के निर्देशों के बाद तेज हुई प्रक्रिया
दीक्षाभूमि के समग्र विकास को लेकर अधिवक्ता शैलेश नारनवरे ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। इसी क्रम में सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने 13 दिसंबर को संबंधित विभागों की बैठक लेकर विकास कार्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करने के आदेश दिए थे।
सरकार और प्राधिकरण अब इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रहे हैं।
क्यों जरूरी है दीक्षाभूमि का विकास?
हर वर्ष धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर जयंती और महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर देश-विदेश से लाखों अनुयायी दीक्षाभूमि पहुंचते हैं।
अधिवक्ता नारनवरे के अनुसार, वर्तमान में बुनियादी सुविधाओं की कमी, यातायात प्रबंधन की समस्याएं और समुचित नियोजन के अभाव के कारण श्रद्धालुओं को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बढ़ती संख्या को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं और व्यवस्थित संरचना की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
मूल स्तूप सुरक्षित, केवल परिसर का होगा सौंदर्यीकरण
सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने स्पष्ट किया है कि दीक्षाभूमि करोड़ों अनुयायियों की आस्था का प्रतीक है, इसलिए विकास कार्य पूरी संवेदनशीलता और सावधानी के साथ किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिया है कि मूल स्तूप को किसी भी प्रकार की क्षति पहुंचाए बिना केवल परिसर का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत आधुनिक वास्तुकला के अनुरूप लैंडस्केपिंग, व्यवस्थित पाथ-वे, आकर्षक साउंड एवं लाइटिंग थीम तथा बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके।
दीक्षाभूमि के इस बहुप्रतीक्षित विकास से न केवल श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि नागपुर को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान भी मिलेगी।

