नागपुर: जिला परिषद चुनाव की घोषणा का इंतजार

आज राज्य चुनाव आयोग तैयारियों की करेगा समीक्षा

नागपुर, राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं। पहले चरण में ग्रामीण भागों में नगर परिषद व नगर पंचायत के चुनाव किए गए। दूसरे चरण में 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव हो रहे हैं। 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 को इसके परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे। अब केवल जिला परिषद व पंचायत समितियों के चुनाव शेष रह गए हैं और ग्रामीण भागों की जनता व सभी राजनीतिक दल राज्य चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

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जानकारी मिली है कि मंगलवार को चुनाव आयोग राज्यभर के जिलों के चुनाव विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर चुनाव तैयारियों की समीक्षा करने वाला है। उसके बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने की संभावना है।

नागपुर की बात करें तो यहां भी आरक्षण 57 प्रतिशत चला गया है। जिनमें 57 सीटों में 10 एससी, 8 एसटी और 15 सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित की गई हैं। ओबीसी को 27 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया है जिसके चलते सीमा पार हो गया है। बताते चलें कि ओबीसी आरक्षण के चलते बीते चुनाव में सीमा 50 प्रतिशत से ऊपर चली गई थी। ओपन वर्ग की 16 सीटों के चुनाव करवाने पड़े थे। चुनाव में खड़े उम्मीदवारों को दोबारा चुनाव का खर्च उठाना पड़ा था।

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अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों में संशय है कि आरक्षण लागू होने के बाद फिर सदस्य रहेंगे या उन्हें चुनाव लड़ना पड़ेगा। हालांकि सभी की नजरें चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पर टिकी हैं।

आयोग द्वारा अदालत से जिला व पंचायत चुनाव के लिए कुछ समय बढ़ाने की अपील भी की जा सकती है क्योंकि अगर 31 जनवरी के भीतर चुनाव कराना पड़ा तो आयोग को 20 दिन का ही समय मिल पाएगा। उस पर अगर 50 प्रतिशत से ऊपर आरक्षण जिप व पंचायत में छोड़ना पड़ा तो फिर से चुनाव कुछ समय बाद आयोजित करना पड़ेगा।

ऐसी स्थिति में दो चरणों में चुनाव करवाए जा सकते हैं। हालांकि नगर परिषद, नगर पंचायत व मनपा चुनावों में कुछ जगहों पर आरक्षण 50 फीसदी से अधिक होने के बावजूद चुनाव कराए गए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या सारे जिला परिषद के चुनाव एक साथ होंगे या चरणबद्ध तरीके से।

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