शीतकालीन अधिवेशन के दौरान नागपुर में बड़ा आंदोलन, 50 से अधिक मोर्चे-जुलूस की तैयारी

नागपुर: महाराष्ट्र की दूसरी राजधानी नागपुर इस बार के हिवाळी अधिवेशन के दौरान अभूतपूर्व आंदोलनों का केंद्र बनने जा रही है। 8 दिसंबर से शुरू होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा के अधिवेशन के साथ ही शहर में जनआक्रोश खुलकर सड़कों पर उतरने वाला है। 8 से 14 दिसंबर के बीच नागपुर में 52 से अधिक मोर्चे, 28 धरने, 21 आमरण अनशन और 4 आत्मदाह की धमकियों वाले आंदोलन प्रस्तावित हैं, जो विभिन्न मुद्दों पर सरकार की कथित उदासीनता के खिलाफ जनता की गहरी नाराज़गी को दर्शाते हैं।

अधिवेशन के दौरान होने वाले इन प्रदर्शनों में रोजगार के अवसर, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, परियोजना प्रभावित परिवारों का पुनर्वास, आदिवासी अधिकार, किसानों की समस्याएँ, सामाजिक न्याय के मुद्दे और प्रशासनिक अनदेखी जैसी गंभीर मांगें शामिल होंगी। लंबे समय से इन मुद्दों पर उचित कार्रवाई न होने के कारण कई संगठन और जनता अब विरोध के आक्रामक रूप अपनाने के लिए तैयार हैं।

हफ्ते के मध्य में आंदोलन अपने चरम पर होंगे, जब कई संगठन बड़ी रैलियाँ, मोर्चे और धरने निकालेंगे। बुधवार और गुरुवार को सबसे अधिक भीड़ और विरोध देखने की संभावना है। अधिवेशन स्थल, सरकारी विभागों और प्रमुख चौकों के आसपास पुलिस को अत्यधिक सतर्कता बरतनी होगी। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण, रूट डायवर्जन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल और तैनात विशेष दस्तों के माध्यम से स्थिति पर नज़र रखी जाएगी।

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इतने बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाले इन प्रदर्शनों का असर हिवाळी अधिवेशन की कार्यवाही पर भी पड़ सकता है। कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो विरोध और अधिक तीव्र रूप ले सकता है। नागपुर इस पूरे सप्ताह राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलचलों का प्रमुख केंद्र बना रहेगा, और सभी की निगाहें अधिवेशन तथा आंदोलनों के परिणामों पर टिकी रहेंगी।

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