वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ चल रहा युद्ध लगभग जीत लिया गया है और अब जल्द ही इसे खत्म किया जा सकता है। ट्रम्प के मुताबिक अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है और अब वहां “लगभग कुछ भी बचा नहीं है” जिसे निशाना बनाया जा सके।
हालांकि दूसरी ओर ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए तीन अहम शर्तें रख दी हैं, जिससे अब सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इन शर्तों को मानेंगे या नहीं।
ट्रम्प का बड़ा दावा – युद्ध लगभग खत्म
ट्रम्प ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य कार्रवाई से ईरान की सैन्य ताकत को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनका कहना है कि यदि वे चाहें तो युद्ध कभी भी समाप्त किया जा सकता है और अभियान अपने लक्ष्य के करीब है।
हालांकि कई विश्लेषकों का मानना है कि जमीनी हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण हैं और क्षेत्र में हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है।
ईरान की पहली शर्त – सभी हमले तुरंत बंद हों
ईरान ने साफ कहा है कि सबसे पहले अमेरिका और इजरायल को सभी सैन्य हमले पूरी तरह बंद करने होंगे।
तेहरान का कहना है कि जब तक हमले जारी रहेंगे, तब तक किसी भी तरह की शांति वार्ता संभव नहीं है।
दूसरी शर्त – भविष्य में हमला न करने की गारंटी
ईरान ने यह भी मांग रखी है कि अमेरिका और इजरायल लिखित रूप में यह आश्वासन दें कि भविष्य में दोबारा हमला नहीं किया जाएगा।
तेहरान का कहना है कि सिर्फ अस्थायी युद्धविराम नहीं, बल्कि स्थायी सुरक्षा की गारंटी जरूरी है।
तीसरी शर्त – ईरान के अधिकारों को मान्यता
ईरान का कहना है कि उसके राष्ट्रीय अधिकारों और संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जाए।
तेहरान के अनुसार, यदि यह मान्यता नहीं मिलती तो युद्ध खत्म करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
क्या नेतन्याहू मानेंगे ये शर्तें?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इन शर्तों को स्वीकार करेंगे या नहीं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इजरायल अभी भी ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करने के लक्ष्य पर अड़ा हुआ है, इसलिए समझौता आसान नहीं माना जा रहा।

