12 वर्षों बाद मां-बेटी का भावुक मिलन, प्रादेशिक मनोरुग्णालय में छलके आंसू

नागपुर के प्रादेशिक मनोरुग्णालय में सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। लगभग 12 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एक मां का अपनी बेटी से मिलन हुआ। विधिवत प्रक्रिया पूरी होने के बाद कविता (बदला हुआ नाम) को उनकी बेटी के सुपुर्द कर दिया गया।

यह पुनर्मिलन न केवल भावनात्मक था, बल्कि उम्मीद और संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों की मिसाल भी बना।

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🔹 मुंबई में बिछड़ा था परिवार

मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में मुंबई में एक पुल के नीचे से पुलिस ने कविता को उनके बच्चों के साथ बरामद किया था। उस समय उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।

  • बच्चों को चाइल्ड लाइन के माध्यम से सुधार गृह भेजा गया।
  • कविता को बाद में शासकीय प्रियदर्शिनी महिला छात्रावास, नागपुर में दाखिल किया गया।

🔹 उपचार से मानसिक स्थिति में सुधार

20 फरवरी 2024 को कविता को छात्रावास से प्रादेशिक मनोरुग्णालय, नागपुर में भर्ती कराया गया। उपचार और नियमित परामर्श के बाद उनकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ।

  • वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. पंकज बागड़े के उपचार से उनकी हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
  • परामर्श सत्रों के दौरान उन्होंने अपने परिवार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

हालांकि स्वास्थ्य में सुधार के बावजूद उन्हें अपने परिवार की याद लगातार व्यथित करती रही।

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🔹 समाजसेवा विभाग ने शुरू की खोज

प्राप्त जानकारी के आधार पर समाजसेवा अधीक्षक कुंदा काटेखाये बिडकर ने परिवार की तलाश की प्रक्रिया शुरू की।

  • श्रद्धानंद अनाथ आश्रम से संपर्क किया गया।
  • वहां से बच्चों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

इसके बाद मां-बेटी के पुनर्मिलन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

🔹 बाल कल्याण समिति के सहयोग से हुआ पुनर्मिलन

मुलाकात सुनिश्चित करने के लिए बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष छाया गुरव से संपर्क किया गया। उनके सहयोग से बेटी को अस्पताल लाया गया।

सोमवार को सभी औपचारिकताएं पूरी कर कविता को उनकी बेटी के सुपुर्द कर दिया गया।

इस अवसर पर:

  • वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुथे
  • समाजसेवा अधीक्षक कुंदा बिडकर काटेखाये
  • स्नेहा तभाणे
  • वामिना नगरे
  • तथा कविता की बेटी

उपस्थित रहे।

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संवेदनशील प्रयासों की मिसाल

यह घटना दर्शाती है कि निरंतर उपचार, सामाजिक प्रयास और प्रशासनिक समन्वय से बिछड़े परिवारों को दोबारा मिलाया जा सकता है। 12 वर्षों बाद हुआ यह मिलन उम्मीद और मानवीय संवेदनाओं की एक प्रेरणादायक कहानी बन गया है।

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