शिक्षक-कर्मचारियों की संक्रांति पर ‘ग्रहण’

चुनावी ड्यूटी में रहेंगे व्यस्त, वर्ष का पहला त्योहार फीका

नागपुर, महानगर संवाददाता:
वर्ष का पहला त्योहार मकर संक्रांति इस बार शिक्षक और गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों के लिए फीका रहने वाला है। मनपा चुनाव के चलते बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी चुनावी ड्यूटी में तैनात रहेंगे, जिससे वे संक्रांति का त्योहार अपने परिवार के साथ नहीं मना पाएंगे।

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प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, 14 जनवरी से ही चुनावी ड्यूटी शुरू हो जाएगी, जबकि 15 जनवरी को मतदान होना है। इसके चलते शिक्षक-कर्मचारियों को 15 जनवरी की रात तक ही अपने घर लौटने की अनुमति मिलेगी। इस कारण शिक्षकों में नाराजगी का माहौल देखा जा रहा है।

मकर संक्रांति को लेकर नागपुर में पारंपरिक रूप से पतंगबाजी, ‘तिलगुल घ्या, गोड-गोड बोला’ जैसे संदेशों के साथ नए वर्ष की शुरुआत की जाती है, लेकिन इस बार चुनावी जिम्मेदारियों के कारण त्योहार पर ‘ग्रहण’ लग गया है

शिक्षक संगठनों में असंतोष

शुरुआत में कुछ शिक्षक संगठनों ने चुनावी ड्यूटी का विरोध किया था, लेकिन मनपा आयुक्त ने इसे अनिवार्य बताते हुए सख्त रवैया अपनाया। इसके बाद शिक्षक और कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है। हालांकि खुलकर विरोध कोई नहीं कर पा रहा, लेकिन अंदरखाने असंतोष साफ दिखाई दे रहा है।

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कड़ाके की ठंड के बीच चुनावी ड्यूटी अनिवार्य होने से शिक्षकों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। सर्दी-जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों को भी ड्यूटी पर बुलाया गया है, जिससे तनाव और परेशानी बढ़ गई है।

शिक्षकों का कहना है कि बीमार शिक्षकों को ड्यूटी से राहत दी जानी चाहिए, साथ ही महिला शिक्षकों को भी आवश्यकतानुसार चुनावी कार्य से दूर रखा जाए। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक इस पर कोई राहत भरा निर्णय सामने नहीं आया है।

कुल मिलाकर, इस बार मनपा चुनाव के कारण शिक्षक और कर्मचारी वर्ग के लिए मकर संक्रांति का त्योहार फीका रहने वाला है।

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