नागपुर के ताजबाग विकास योजना (फेज-टू) के कार्य प्रशासनिक प्रक्रिया में फंसे होने के कारण अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। जबकि इस परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और संशोधित लागत को लेकर आवश्यक स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है, इसके बावजूद अनिवार्य सरकारी अधिसूचना (Government Notification) जारी न होने से काम ठप पड़ा हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ताजबाग विकास योजना फेज-टू के लिए 224.51 करोड़ रुपये की प्रारंभिक लागत वाली डीपीआर नागपुर महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (NMRDA) द्वारा तैयार की गई थी। इस डीपीआर को पहले नागपुर के पालकमंत्री की अध्यक्षता वाली मॉनिटरिंग कमेटी से मंजूरी मिली थी। इसके बाद यह प्रस्ताव 15 मार्च 2024 को प्रशासनिक स्वीकृति के लिए राज्य के नियोजन विभाग (State Planning Department) को भेजा गया।
इस प्रस्ताव पर 18 मार्च 2024 को राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाई-पावर कमेटी की बैठक में विस्तार से चर्चा हुई। गहन विचार-विमर्श के बाद समिति ने परियोजना में कुछ संशोधन सुझाए और कुल लागत को घटाकर 95.18 करोड़ रुपये करने का निर्णय लिया। समिति ने इस संशोधित प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए एपेक्स कमेटी के पास भेजने पर सहमति जताई।
मार्च 2024 में ही हाई-लेवल कमेटी द्वारा 95.18 करोड़ रुपये के संशोधित प्रावधान को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई थी। इसके बावजूद, फेज-टू के कार्य शुरू करने के लिए आवश्यक सरकारी अधिसूचना अब तक जारी नहीं की गई है।
अधिसूचना के अभाव में ताजबाग फेज-टू का पूरा विकास कार्य रुका हुआ है। इससे क्षेत्र के नागरिकों, व्यापारियों और अन्य हितधारकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लोगों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नहीं हो रही है।
स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द अधिसूचना जारी कर फेज-टू विकास कार्यों की स्पष्ट समयसीमा तय की जाए। उनका कहना है कि परियोजना शुरू होने से क्षेत्र में सड़क, बुनियादी सुविधाएं और समग्र विकास को गति मिलेगी।
फिलहाल, ताजबाग फेज-टू विकास योजना सभी आवश्यक मंजूरियों के बावजूद केवल एक अधिसूचना के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रही है, और क्षेत्रवासियों को अब भी इंतजार करना पड़ रहा है।

