उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यौन शोषण के गंभीर आरोपों के बाद उन्होंने मीडिया के सामने पहला बयान दिया है। यह बयान धार्मिक समुदाय में चर्चा का विषय बना हुआ है।
🧵 मुख्य बिंदु
1. आरोपों का खंडन
✔️ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जिन छात्रों का ज़िक्र आरोपों में है, वे हमारे गुरुकुल से नहीं हैं।
✔️ उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कभी हमारे गुरुकुल में आए भी नहीं, न पंजीकृत हुए और न पढ़ाई की है।
2. FIR और जांच
🔎 झूंसी पुलिस स्टेशन में यौन शोषण के आरोपों पर FIR दर्ज की जाएगी, जिसके लिए POCSO कोर्ट ने आदेश जारी किया है।
🔎 FIR में बताया गया है कि माघ मेले के दौरान दो नाबालिग के साथ दुर्व्यवहार हुआ — जिसे “गुरु सेवा” के बहाने किया गया।
🔎 प्राथमिकी में बीएनएस और POCSO की गंभीर धाराएँ लागू की गई हैं।
3. पुलिस की कार्यवाही
👮 पुलिस की पाँच सदस्यीय टीम सबूत जुटाने और पीड़ितों/शिकायतकर्ता का बयान लेने में लगी हुई है।
👮 पूछताछ के लिए अविमुक्तेश्वरानंद से बनारस में पुलिस ने संपर्क किया है।
4. शंकराचार्य का आरोप
⚖️ स्वामी ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला धर्माचार्यों और सनातन धर्म के खिलाफ एक रणनीति है और सत्य आख़िरकार सामने आएगा।
🔎 संदर्भ / बैकग्राउंड
- FIR प्रयागराज की POCSO कोर्ट के निर्देश पर दर्ज की जाएगी।
- शिकायतकर्ता का कहना है कि दो नाबालिगों को यौन शोषण का सामना करना पड़ा, जिसमें एक नाबालिग भी शामिल है।
- अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि छात्र हरदोई के हैं और उनमें से कोई भी हमारे गुरुकुल में नहीं आया।
🧠 निष्कर्ष
यह मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है, जिसमें पुलिस अब सबूत और बयानों की जांच कर रही है। दूसरी तरफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों का कड़ा खंडन किया है, और इसे संस्कृति एवं धर्म के खिलाफ साजिश बताया है।

