महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा से अधिक आरक्षण को लेकर आज हुई सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया और चुनाव स्थगित करने से साफ इनकार कर दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी।
आज की सुनवाई में न्यायालय ने इस मामले को तीन न्यायाधीशों की पीठ के पास भेजने का निर्णय लिया। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्थानीय स्वराज्य संस्था के चुनावों को रोकने का कोई आदेश नहीं दिया गया।
राज्य की 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव उसी प्रकार आयोजित होंगे, जैसे पहले घोषित किए गए थे, ऐसा स्पष्ट निर्देश न्यायालय ने दिया। साथ ही, 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण वाले सभी चुनाव न्यायालय के अंतिम आदेश के अधीन होंगे।
निर्वाचन आयोग ने न्यायालय को जानकारी दी कि 40 नगर परिषदों और 17 नगर पंचायतों में 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक आरक्षण हो गया है। आयोग ने यह भी बताया कि मतदार संघ पुनर्गठन, आरक्षण और मतदाता सूची की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
सुनवाई में बांठिया आयोग की रिपोर्ट फिर से चर्चा में आई। ओबीसी संगठनों ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, लेकिन मुख्य न्यायाधीशों ने अस्थायी उपाय के रूप में इसे एक बेंचमार्क के तौर पर स्वीकार करने का संकेत दिया। रिपोर्ट की वैधता पर अगली सुनवाई 21 जनवरी को विस्तृत रूप से होगी।
न्यायालय ने पहले दिए गए निर्णय को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि ओबीसी आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं रखा जा सकता।
इसलिए, स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों का मार्ग अब पूरी तरह से साफ हो गया है और सभी चुनाव न्यायालय के अंतिम आदेश के अधीन होंगे।

