मुंबई। महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत ई-केवाईसी अनिवार्य न कराने के कारण राज्य की लगभग 67 लाख महिलाएं योजना के लाभ से अपात्र हो गई हैं। सरकार द्वारा लाभार्थियों के लिए 31 दिसंबर तक ई-केवाईसी पूरा करना जरूरी किया गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा तक प्रक्रिया पूरी न करने के चलते इन महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए गए हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना में कुल लगभग 2.47 करोड़ महिलाएं पंजीकृत थीं, जिनमें से करीब 1.80 करोड़ लाभार्थियों ने समय पर ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर ली, जबकि शेष महिलाएं तकनीकी कारणों, जानकारी के अभाव या अन्य समस्याओं के चलते सत्यापन नहीं करा सकीं।
लाडकी बहिन योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर माह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। ई-केवाईसी न होने के कारण अब इन 67 लाख महिलाओं को नवंबर, दिसंबर और जनवरी की किस्त नहीं मिल पाएगी। अधिकारियों के अनुसार, जब तक लाभार्थी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं करेंगी, तब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा।
सरकार का कहना है कि ई-केवाईसी को अनिवार्य करने का उद्देश्य योजना में पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र महिलाओं को ही आर्थिक सहायता मिले। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया था कि कुछ अपात्र लोग योजना का लाभ ले रहे थे, जिसके बाद सत्यापन को सख्त किया गया।
फिलहाल सरकार की ओर से ई-केवाईसी की समय सीमा बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, बड़ी संख्या में महिलाओं के अपात्र होने के बाद इस मुद्दे पर पुनर्विचार की मांग भी उठने लगी है।

