नागपुर: महाराष्ट्र विधानसभा के हिवाळी (शीतकालीन) अधिवेशन की आज से औपचारिक शुरुआत हो गई है। लेकिन इस बार का अधिवेशन कई कारणों से विशेष माना जा रहा है। पहली बार दोनों सदनों में विपक्ष का नेता (Leader of Opposition) नियुक्त न होने के कारण कार्यवाही किस प्रकार चलेगी, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा शुरू हो गई है।
विधानमंडल की कार्यसूची में विपक्ष के नेता की नियुक्ति का कोई उल्लेख न होने पर विपक्षी दलों ने नाराजगी जताई है। दूसरी ओर, विधान परिषद के लिए कांग्रेस ने सतेज पाटिल और विधान सभा के लिए शिवसेना (ठाकरे गट) ने भास्कर जाधव के नाम का आधिकारिक पत्र प्रस्तुत किया है। लेकिन इन नियुक्तियों का उल्लेख अभी तक अधिवेशन की सूची में नहीं दिखाई देने से भ्रम और बढ़ गया है।
अधिवेशन के पहले ही दिन विपक्ष की ओर से सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की पूरी संभावना है। किसान समस्याएँ, अतिवृष्टि से हुए नुकसान, कानून-व्यवस्था की स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर तीखी चर्चा होने के संकेत हैं।
वहीं सरकार की ओर से अधिवेशन को सुचारू रूप से चलाने के प्रयास किए जाने की जानकारी सूत्रों ने दी है। विपक्ष का नेता न होने के चलते चर्चा और प्रक्रियाओं में कई तकनीकी अड़चनें आने की संभावना भी जताई जा रही है।
आने वाले दिनों में यह हिवाळी अधिवेशन कितना गरमाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

