कई जिलों में फैला था काटोलकर का नेटवर्क
नागपुर (कार्यालय प्रतिनिधि) : शालार्थ आईडी घोटाले में पकड़े गए शिक्षाधिकारी संदीप काटोलकर का नेटवर्क केवल नागपुर तक सीमित नहीं था, बल्कि कई जिलों तक फैला हुआ था। जांच में सामने आया है कि काटोलकर ने भंडारा में पदस्थापना के दौरान भी फर्जी शालार्थ आईडी प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इस गंभीर मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इस दिशा में भी जांच तेज कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, काटोलकर ने जिले के माध्यमिक शिक्षा अधिकारी के पद पर रहते हुए वर्ष 2021 से मार्च 2022 के बीच 39 फर्जी शालार्थ आईडी प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। इस शालार्थ आईडी घोटाले के जरिए शासन को लगभग 12 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है।
ईओडब्ल्यू ने काटोलकर को 25 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा है। इसके बाद बुधवार दोपहर ईओडब्ल्यू की टीम ने नागपुर स्थित वेतन अधीक्षक कार्यालय पर छापेमारी की। करीब तीन घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान कार्यालय की गहन तलाशी ली गई और मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ कंप्यूटर में मौजूद डेटा भी जब्त किया गया।
बुधवार को पूरे दिन काटोलकर से पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान काटोलकर ने यह स्वीकार किया कि भंडारा में कार्यरत रहते हुए भी उसने फर्जी प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि घोटाले में और भी अधिकारी तथा कर्मचारी शामिल हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, ईओडब्ल्यू की टीम जल्द ही भंडारा जिले का दौरा कर वहां संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेगी। इस मामले में पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद काटोलकर को न्यायालय में पेश किया जाएगा और आगे की पूछताछ के लिए उसकी कस्टडी बढ़ाने की मांग की जाएगी।
ईओडब्ल्यू अधिकारियों का कहना है कि शालार्थ आईडी घोटाले में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जांच को आगे भी और तेज किया जाएगा।

