📍 स्थान – सातारा / बीड (महाराष्ट्र)
सातारा के फलटण में एक महिला डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली। लेकिन ये कोई आम आत्महत्या नहीं है
बल्कि एक शर्मनाक सिस्टम और पुलिस अत्याचार की कहानी है, जिसने एक होनहार बेटी की ज़िंदगी निगल ली।
यह डॉक्टर दिवाली पर अपने घर बीड लौटने वाली थी,पर दिवाली से पहले ही उसके घर पहुँची उसकी मौत की खबर।
परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है।
उनका कहना है —
“जिसने उसे जीते जी सताया, उसे फाँसी की सज़ा मिलनी चाहिए… डॉक्टर के आत्महत्या से पहले मिले सुसाइड नोट ने पूरे महाराष्ट्र को हिला दिया है।
नोट में उसने लिखा —
“जो मेरी रक्षा करने वाले थे, वही मुझे नर्क में धकेल गए…”
दरअसल, उस डॉक्टर ने पुलिस विभाग के एक अधिकारी पर लगातार यौन शोषण और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। पर किसी ने उसकी बात नहीं सुनी…चार महीने पहले उसने पुलिस उपअधीक्षक को एक चिट्ठी भी लिखी थी। जिसमें उसने बताया था कि किस तरह पुलिस अधिकारी उस पर दबाव बना रहे हैं,
कैसे उसे झूठे मामलों में फँसाने की धमकी दी जा रही है। लेकिन अफसोस… किसी ने उसकी पुकार नहीं सुनी।
न तो विभाग ने कार्रवाई की, न ही सुरक्षा दी गई।
डॉक्टर के परिवार का कहना है —
“अगर उस समय शिकायत पर कार्रवाई होती, तो आज हमारी बेटी ज़िंदा होती।”
अब परिवार और रिश्तेदार आरोपियों को फाँसी की सज़ा दिलाने की मांग कर रहे हैं।
यह सिर्फ एक डॉक्टर की नहीं, बल्कि उस हर महिला की कहानी है जो अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने से डरती है।
आज सवाल सिर्फ इतना है —
कब तक कोई बेटी चुपचाप सब सहती रहेगी?
कब तक सत्ता और सिस्टम के पहरेदार, अत्याचार के रक्षक बने रहेंगे?
“सातारा की इस बेटी की आखिरी चिट्ठी, महाराष्ट्र की आत्मा को झकझोर देने के लिए काफी है…
अब देखना ये है — क्या उसे इंसाफ मिलेगा, या फिर उसकी आवाज़ भी फाइलों में दबी रह जाएगी?”

