सनातन धर्म (Sanatan dharma) में संतोषी माता को संतोष की देवी, सुख-समृद्धि की दात्री और कष्टों को हरने वाली आदिशक्ति माना गया है। जैसे दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती मातृशक्ति के भिन्न रूप हैं, वैसे ही संतोषी माता को शांति, संतोष और साधारण जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन देने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। उनकी भक्ति का मूल संदेश है—
“जहाँ संतोष है, वहीं सुख है।”
संतोषी माता का उद्भव और कथा
लोककथाओं के अनुसार संतोषी माता का जन्म भगवान गणेश के दो पुत्र—लव और कुश की इच्छा से हुआ था। उन्होंने अपने पिता से एक बहन की कामना की, जो सभी भक्तों को संतोष, सुख और कल्याण दे सके। इसी संकल्प से संतोषी माता का प्राकट्य माना जाता है।
सबसे प्रसिद्ध कहानी एक गरीब, साधारण, लेकिन बेहद भक्त स्त्री की है। पति के दूर जाने और अनेकों कष्ट आने के बाद भी उसने ईश्वर और माता पर विश्वास नहीं छोड़ा। एक दिन उसे किसी संत ने संतोषी माता का शुक्रवार व्रत रखने की सलाह दी।
कथा के अनुसार उसने श्रद्धा से व्रत आरंभ किया—
कहाँ भोजन, कहाँ साधन, लेकिन उसके मन में केवल संतोष था।
वह माता के सामने दीप जलाती, गुड़-चने से भोग लगाती और कथा सुनती।
धीरे-धीरे उसके जीवन में परिवर्तन आने लगे।
कष्ट कम हुए, बाधाएँ टूटीं, और अंततः उसका पति भी सकुशल लौट आया।
यह कथा यही संदेश देती है कि—
“सच्चे मन से की गई भक्ति ही जीवन में उजाला करती है।”
संतोषी माता की भक्ति और व्रत का महत्व
संतोषी माता का व्रत विशेष रूप से शुक्रवार को किया जाता है। इसे मनोकामना पूर्ण करने वाला व्रत कहकर संबोधित किया जाता है। पूजा का मुख्य नियम है—
खटाई निषेध, यानी व्रत के दिन खट्टे पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता।
व्रत में समर्पित होते हैं:
- सच्चा मन
- सरल पूजा
- दीपक और जल
- गुड़ और चने का भोग
- माता की कथा
- और “जय संतोषी माता” का जप
कहा जाता है कि यह व्रत विशेष रूप से घर में शांति, आर्थिक सुधार, मनोबल बढ़ाने और परिवार में सुख लाता है। माता की कृपा से क्रोध, चिंता, भय और क्लेश दूर होते हैं, और मन में सकारात्मकता का उदय होता है।
संतोषी माता की उपासना से मिलने वाले लाभ
- मन की शांति और संतोष
माता का नाम लेने से मन शांत होता है, निर्णय स्पष्ट होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है। - कष्टों का नाश
विशेष रूप से आर्थिक और पारिवारिक कष्ट दूर करने के लिए संतोषी माता की पूजा अत्यंत प्रभावी मानी गई है। - घर में सुख-समृद्धि का वास
भक्तों का विश्वास है कि जहाँ संतोषी माता की आराधना होती है वहाँ गरीबी नहीं टिकती। - मनोकामना पूर्ण होती है
श्रद्धा और नियमों से रखा गया शुक्रवार व्रत मन की सच्ची इच्छाओं को पूर्ण करता है। - सकारात्मक ऊर्जा का संचार
माता का मंत्र और कथा घर के वातावरण को शुद्ध और शांत बनाते हैं।
आध्यात्मिक संदेश
संतोषी माता की भक्ति का सबसे बड़ा संदेश है—
“संतोष ही जीवन का सबसे बड़ा धन है।”
आज की तेज़-तर्रार दुनिया में जहाँ चिंता, असंतोष और तनाव हर घर का हिस्सा हैं, वहीं संतोषी माता की उपासना व्यक्ति को भीतर से मजबूत और शांत बनाती है।
भक्ति से आत्मबल मिलता है, आत्मबल से विश्वास, और विश्वास से जीवन में चमत्कार।
जो व्यक्ति माता का स्मरण करता है, उसके जीवन में आशा के द्वार हमेशा खुले रहते हैं।

