गोंदिया में पानी के अवैध कारोबार का बड़ा खेल: लोगों की सेहत से खिलवाड़, करोड़ों का टर्नओवर

गोंदिया: महाराष्ट्र के गोंदिया शहर में पीने के पानी के नाम पर एक बड़ा और अनियंत्रित व्यवसाय चल रहा है, जो सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा है। शहर में हजारों लीटर पानी रोजाना कूल जार (Water Jar) के जरिए सप्लाई किया जाता है, लेकिन इस पानी की गुणवत्ता और शुद्धता की कोई आधिकारिक जांच व्यवस्था नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस कारोबार से हर साल करोड़ों रुपये का टर्नओवर हो रहा है, जबकि अधिकांश कारोबार बिना किसी पंजीकरण और नियंत्रण के चल रहा है।

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शहर में रोज बिकते हैं हजारों पानी के जार

गोंदिया शहर में रोजाना करीब 15 से 20 हजार कूल जार पानी की बिक्री होने का अनुमान है। यदि एक जार की कीमत लगभग 30 रुपये मानी जाए तो इस आधार पर शहर में इस व्यवसाय का वार्षिक टर्नओवर करीब 4 से 5 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।

बिना पंजीकरण चल रहा है पानी का कारोबार

जानकारी के अनुसार, शहर में कई छोटे-बड़े व्यापारी बिना किसी सरकारी पंजीकरण के पानी के जार भरकर विभिन्न स्थानों पर सप्लाई कर रहे हैं। इनमें मंगल कार्यालय, सरकारी-अर्धसरकारी दफ्तर, दुकानें और अन्य संस्थान शामिल हैं, जहां रोजाना यही पानी उपयोग में लाया जाता है।

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गुणवत्ता जांच की कोई व्यवस्था नहीं

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पानी की गुणवत्ता, शुद्धता और स्रोत की जांच करने के लिए न तो व्यापारियों के पास कोई तकनीकी व्यवस्था है और न ही प्रशासन के पास कोई स्पष्ट निगरानी प्रणाली है। इससे लाखों लोग रोजाना ऐसा पानी पी रहे हैं जिसकी स्वच्छता की कोई गारंटी नहीं है।

फूड एंड ड्रग प्रशासन के नियंत्रण से बाहर

सूत्रों के अनुसार, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) केवल सीलबंद बोतलबंद पानी पर ही नियंत्रण रख सकता है। जबकि कूल जार में सप्लाई होने वाला पानी ‘लूज वाटर’ की श्रेणी में आता है, इसलिए उस पर FDA का सीधा नियंत्रण नहीं होता। इसी वजह से यह पूरा व्यवसाय कानूनी निगरानी से लगभग बाहर चल रहा है।

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व्यवसायियों की मांग – मिले कानूनी मान्यता

इस कारोबार से जुड़े कई लोगों का कहना है कि वे भी अपने व्यवसाय का पंजीकरण कराना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी ही नहीं है कि इसके लिए किस सरकारी विभाग में आवेदन करना होगा। उनका मानना है कि यदि इस व्यवसाय को कानूनी मान्यता दी जाए तो इससे हजारों लोगों को रोजगार भी मिलता रहेगा और व्यवस्था भी पारदर्शी बनेगी।

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