नागपुर: महाराष्ट्र विधान भवन में शीतसत्र अधिवेशन के दूसरे दिन विपक्ष ने किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा। किसान कर्जमाफी और कपास–सोयाबीन को उचित मूल्य देने की मांग को लेकर विरोधी दलों ने विधान भवन की सीढ़ियों पर जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह फडणवीस नहीं बल्कि “फसणवीस सरकार” है।
विरोधी दलों के नेता हाथों में बैनर लेकर विधान भवन की ओर मार्च करते हुए नारेबाजी की। बैनरों पर लिखा गया: “सोयाबीन को नहीं भाव, सत्ता के लिए महायुति की भागदौड़”, “कर्जदार किसानों को पैकेज नहीं, फडणवीस का पैकेज सिर्फ छलावा”, “वित्त मंत्री की जेब खाली है, पैकेज फडणवीस का फर्जी है”, “किसान भुख से मर रहा है”।
इस दौरान विपक्षी नेताओं ने गले में कपास की कलियों की माला पहनकर “सरकार मलाई खा रही, किसान भूखा मर रहा” जैसे नारे भी लगाए। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक विजय वडेट्टीवार, राकांपा के शशिकांत शिंदे, शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के आदित्य ठाकरे, भास्कर जाधव, सुनील प्रभु, सचिन अहिर, वरुण सरदेसाई, सिद्धार्थ खरात, प्रवीण स्वामी, कांग्रेस के सतेज पाटील और अस्लम शेख जैसे नेता इस विरोध में मौजूद थे।
कांग्रेस विधायक वडेट्टीवार ने कहा कि राज्य में औसतन रोजाना आठ किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महायुति सरकार किसानों के नाम पर केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि उसकी नीति किसान-विरोधी है। धान और सोयाबीन को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। वर्तमान में सोयाबीन के लिए केवल 4,000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहे हैं, जो समर्थन मूल्य से काफी कम है। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की स्थिति देखकर शर्म आनी चाहिए।

