अच्छी और सुलभ स्वास्थ्य सेवा नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। इसी उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा महात्मा फुले जनस्वास्थ्य योजना और आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लागू की गई हैं।
हालांकि, इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद नागपुर जिले में प्राइवेट अस्पतालों की रुचि बेहद कम दिखाई दे रही है। जिले में जहां करीब 2000 से 2500 अस्पताल संचालित हैं, वहीं इन योजनाओं में केवल 86 अस्पताल ही शामिल हैं।
🔎 योजनाओं का दायरा बढ़ा, फिर भी अस्पताल पीछे
सरकार ने योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं—
- पहले 1,362 बीमारियों का इलाज शामिल था, अब इसे बढ़ाकर 2,399 बीमारियाँ कर दिया गया है।
- उपचार खर्च की सीमा 5 लाख रुपये तक कर दी गई है।
- प्रत्येक बीमारी के लिए अलग-अलग पैकेज दरें निर्धारित हैं।
- अस्पतालों को प्रतिपूर्ति राशि लगभग 1 से 2 महीने के भीतर मिल जाती है।
इसके बावजूद प्राइवेट अस्पताल इन योजनाओं से दूरी बनाए हुए हैं।
💰 प्राइवेट अस्पताल क्यों नहीं हो रहे शामिल?
विशेषज्ञों के अनुसार मुख्य कारण है मंजूर की गई निधि का कम होना।
- प्राइवेट अस्पतालों पर बढ़ते टैक्स और संचालन खर्च
- आधुनिक इलाज में बढ़ती मेडिकल लागत
- सरकार द्वारा तय पैकेज राशि अस्पतालों को अपर्याप्त लगना
इन्हीं कारणों से अस्पताल संचालक योजना में शामिल होने से कतरा रहे हैं।
🗣️ विशेषज्ञ की राय
डॉ. अशोक अरबट, अध्यक्ष, विदर्भ प्राइवेट अस्पताल एसोसिएशन का कहना है
“प्राइवेट अस्पतालों की रुचि कम होने की मुख्य वजह निधि की कमी है। अस्पतालों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। अच्छे इलाज के लिए अधिक खर्च करना पड़ता है, जबकि सरकार से मिलने वाली राशि पर्याप्त नहीं है। बेहतर होगा कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि ज्यादा मरीजों को लाभ मिल सके।”
📊 प्रमुख आंकड़े
➤ खर्च और पात्रता
- खर्च की सीमा: 5 लाख रुपये तक
- जरूरी बेड क्षमता: 10 से 30 बेड
- शामिल बीमारियाँ: 2,399
➤ 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक लाभार्थी
- नागपुर: 99,853
- वर्धा: 29,487
- भंडारा: 24,622
- गोंदिया: 8,864
- चंद्रपुर: 6,303
- गडचिरोली: 1,846
➤ योजना में शामिल अस्पताल (विभाग अनुसार)
- नागपुर: 86
- चंद्रपुर: 32
- भंडारा: 27
- गोंदिया: 27
- गडचिरोली: 23
- वर्धा: 21
🏥 24 फरवरी से बड़े बदलाव लागू
सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने योजनाओं के ढांचे में सुधार की घोषणा की है।
✨ क्या बदलेगा?
- बीमारियों की संख्या 2,399 कर दी गई
- अब PHC और UPHC में भी मिलेगा योजना का लाभ
- नया ‘TMC-2.0’ पोर्टल लागू
- AI तकनीक से फर्जी मरीजों की पहचान
- अस्पतालों को करीब एक महीने में भुगतान सुनिश्चित
⚖️ आगे की राह
सरकार योजनाओं का दायरा और पारदर्शिता बढ़ा रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पैकेज दरों में संशोधन किए बिना प्राइवेट अस्पतालों की भागीदारी बढ़ पाएगी?
जब तक सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच संतुलन नहीं बनेगा, तब तक लाखों पात्र मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा का पूरा लाभ मिल पाना मुश्किल रहेगा।

