कन्हान के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में इन दिनों एक ऐसी तस्वीर देखने को मिल रही है, जो दिल को झंझोड़ देने वाली है। शाम के वक़्त दूर-दराज़ से आई महिलाएँ, जो दिन भर का काम छोड़कर इलाज की उम्मीद लेकर आती हैं, उन्हें डॉक्टर से सलाह तो मिलती है, लेकिन दवा का इंतज़ाम न होने के कारण उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है।
ज़रा सोचिए, ये महिलाएँ अपने घरों से कितनी उम्मीदें लेकर आती हैं। कई किलोमीटर का सफ़र करके, अपनी रोजमर्रा की ज़िम्मेदारियाँ छोड़कर, जब वे PHC पहुँचती हैं तो वहाँ डॉक्टर मौजूद हैं, पर दवा देने वाला कोई नहीं।
इससे बड़ा सवाल यह उठता है कि प्रशासन की ज़िम्मेदारी कहाँ है? क्या सिर्फ़ डॉक्टर की मौजूदगी काफी है, या दवाओं की उपलब्धता भी उतनी ही ज़रूरी है? गरीब और वंचित तबके के लिए ये केंद्र एक आसरा है, लेकिन बिना दवा के यह आसरा अधूरा है।
महिलाओं की आँखों में उम्मीद की जगह अब निराशा और नाराज़गी है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे समवेदनशील मामलों पर तुरंत ध्यान दे और सुनिश्चित करे कि PHC में दवाओं का वितरण नियमित रूप से हो। अगर ये लापरवाही जारी रही, तो इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो पहले से ही संघर्श में हैं।

