पुणे के मुंधवा इलाके की जमीन ख़रीद मामले में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि करीब 1800 करोड़ रुपये की 43 एकड़ जमीन, सिर्फ 300 करोड़ रुपये में खरीदी गई। विपक्ष का कहना है कि इस खरीद-फरोख्त में जबर्दस्त घोटाला हुआ है और इसमें अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम सामने आ रहा है।
जानकारी के मुताबिक, अमीडिया कंपनी द्वारा यह जमीन खरीदी गई। आरोप है कि यह जमीन वतन की जमीन थी और इसे खरीदने से पहले सरकारी अनुमति, मंजूरी और असली मालिकों को उचित मुआवजा देना जरूरी था। लेकिन दस्तावेजों में यह स्पष्ट नहीं है कि मूल मालिकों को कितना भुगतान किया गया।
विपक्ष का दावा है कि
• जमीन की वास्तविक कीमत लगभग 1800 करोड़ रुपये थी
• लेकिन सौदा मात्र 300 करोड़ रुपये में किया गया
• और सिर्फ 500 रुपये के स्टांप पर जमीन का लेन-देन दिखाया गया
मामला सामने आते ही राजनीतिक घमासान तेज…
दो दिन पहले अजित दादा पवार किसानों के लिए बोल रहे थे कि
“सरकार किसानों की स्टैंप ड्यूटी माफ़ करेगी, उन्हें कोई अतिरिक्त खर्च नहीं देना पड़ेगा”
लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि किसानों के लिए फुकट, और अपने बेटे की कंपनी के लिए क्या?
आरोप है कि अजित पवार के बेटे की कंपनी जिसका नाम AMADEA है, उसका शेयर कैपिटल सिर्फ़ 1 लाख रुपये है। इसी कंपनी ने पुणे के कोरेगांव पार्क क्षेत्र में करीब 43 एकड़ जमीन 300 करोड़ में खरीदी है।
इस सौदे पर 500 रुपये की स्टैंप ड्यूटी दी गई है।
जबकि नियमों के मुताबिक़
इस जमीन पर क़रीब 21 करोड़ रुपये की स्टैंप ड्यूटी बनती थी,
जो सरकार ने माफ़ कर दी।
अब सवाल यह है:
🔹 किसानों को फुकट स्टैंप ड्यूटी की बात करने वाले अजित पवार बताएँ
अपने बेटे की कंपनी को 21 करोड़ की स्टैंप ड्यूटी क्यों माफ़ की गई?
🔹 क्या यह जनहित है, या परिवार हित?
🔹 क्या सरकार की नीतियाँ आम जनता के लिए हैं, या नेताओं के परिवार के लिए?
जनता पूछ रही है जवाब।
एक न्याय जनता के लिए, और एक व्यवस्था नेताओं के लिए?

