नागपुर: शहर में तेजी से बढ़ते विस्तार, बढ़ती आबादी और आसमान छूती घरों की कीमतों के कारण झोपड़पट्टियों का जाल लगातार फैला है। वर्तमान में नागपुर शहर में कुल 426 झोपड़पट्टियाँ मौजूद हैं, जिनमें 298 घोषित और 128 अघोषित शामिल हैं। बढ़ती झोपड़पट्टियों ने नागरी प्रशासन पर भारी दबाव खड़ा कर दिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों पर नागपुर महानगरपालिका अब तक 2,210 झोपड़पट्टीधारकों को मालिकाना हक के पट्टे दे चुकी है। हालांकि, अभी भी 4,815 पात्र नागरिक ऐसे हैं जिन्हें पट्टे नहीं मिले हैं। इससे इन परिवारों में निराशा और असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है।
अघोषित झोपड़पट्टियों में 1.23 लाख से ज्यादा लोग रह रहे हैं
जवाहरलाल नेहरू नगरीय पुनरुत्थान योजना (JNNURM) के तहत किए गए सर्वेक्षण में शहर में निजी, मनपा और सरकारी जमीनों पर कुल 298 झोपड़पट्टियाँ पाई गई थीं। इसके आधार पर 18 सितंबर 2015 को मनपा ने नोटिफिकेशन भी जारी किया था।
सबसे चिंताजनक स्थिति अघोषित झोपड़पट्टियों की है, जहां 18,966 झोपड़ियाँ मौजूद हैं और इनमें 1,23,000 से अधिक लोग रह रहे हैं। यह स्थिति प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है
केंद्र सरकार ने बेघर परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की थी, लेकिन जिन नागरिकों के आवेदन स्वीकृत हुए, उन्हें मनपा की ओर से आर.एल. लेटर (RL Letter) की शर्त लगाकर योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया। इससे कई गरीब परिवारों का पक्का घर पाने का सपना अधूरा रह गया।
नागपुर में झोपड़पट्टियों का विस्तार और हजारों पात्र नागरिकों को मालिकाना पट्टों के लिए लंबा इंतजार, शहरी विकास और आवास योजनाओं की मौजूदा स्थिति पर बड़े सवाल खड़े करता है। प्रशासन के प्रयास जारी हैं, लेकिन तेजी से बढ़ती झोपड़पट्टियों की संख्या ने शहर की योजनाओं और प्रबंधन व्यवस्था को चुनौती दी है।

