देवतले के लिए खाई गोली, उसने छोड़ा साथ
नागपुर, कार्यालय प्रतिनिधि।
चाचा और भतीजों के बीच चल रहे संपत्ति के विवाद में हिंगणा थाना अंतर्गत गुमगांव में हुई फायरिंग में आज एक गरीब जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है। उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। इस वारदात से उसका कोई लेना-देना नहीं था। वह तो केवल बुलावे पर रोज़ी-रोटी से काम करने गया था।
बीते 24 दिसंबर को हुई इस वारदात में चाचा नाना देवतले ने बुलाकर अपने भतीजे प्रविण चंद्रकांत देवतले और नितिन चंद्रकांत देवतले पर 12 बोर की रायफल से गोली चला दी थी। बुलेटबारी के एक कॉलेज में प्राध्यापक नितिन देवतले अपने साथ घर का काम करवाने के लिए पारंपरिक निवासी विजय शंकर थानावर (35) को ले गया था। गोली से निकले छर्रों ने विजय को छलनी कर दिया। प्रविण और नितिन तो बच गए लेकिन विजय के पेट और हाथ पर गंभीर चोट आई।
नितिन ने उसे बुटीबोरी स्थित अपने ही रिश्तेदार के अस्पताल में भर्ती करवाया। गोली के छर्रे विजय के पेट, आंतों और हाथ पर लगे थे। डॉक्टर ने आनन-फानन में विजय की एक किडनी निकाल दी। आंतें भी काटकर बाहर निकाली गईं, लेकिन उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई थी। 24 घंटे डायलिसिस पर रखना आवश्यक था। ऐसे में उसे शहर के किसी बड़े अस्पताल में ले जाने की सलाह दी गई।
दिलाया था हरसंभव मदद का भरोसा
तब नितिन ने विजय की पत्नी स्नेहल और परिजनों को इलाज में पूरी मदद करने का भरोसा दिलाया। चूंकि विजय को गोली उसी की वजह से लगी थी, इसलिए अस्पताल का सारा खर्च उठाने का आश्वासन दिया। परिजनों ने विजय को जगनाडे चौक के समीप निजी अस्पताल में शिफ्ट किया। उस समय नितिन ने उनके साथ एक व्यक्ति को भेजा था।
दूसरे दिन नितिन ने स्नेहल के खाते में 90,000 रुपये ट्रांसफर किए और विजय का उपचार शुरू हुआ। अब निजी अस्पताल में इलाज का खर्च कितना होता है, यह हर कोई जानता है। लेकिन दूसरे दिन ही नितिन ने अपना फोन बंद कर दिया। विजय के परिजन कॉल करते रहे लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। परिजनों ने नितिन के घर जाकर पूछताछ की।
अब भी हालत नाजुक
विजय की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। हर तरह के इलाज किए जा रहे हैं लेकिन बॉडी रिस्पॉन्ड नहीं कर रही है। सोमवार को डॉक्टर ने विजय का एक हाथ ही शरीर से अलग करने का निर्णय लिया और ऑपरेशन भी किया गया। परिजनों ने बताया कि नितिन इलेक्ट्रिशियन का काम करता है। वह नितिन के बुलावे पर कुछ भी काम करने चला जाता था। उसका विवाद से कोई लेना-देना नहीं था। नितिन के कारण उसकी यह हालत हुई है।
पहले उसने इलाज का पूरा खर्च देने का आश्वासन दिया था लेकिन अब मुकर रहा है। परिजनों ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर अब तक 14 लाख रुपये खर्च कर दिए हैं। अब बस एक मकान बचा है। पति की जान बचाने के लिए स्नेहल घर बेचने को भी तैयार है। स्नेहल और 12 वर्षीय बड़ा बेटा सिकलसेल से ग्रस्त है। किसी तरह जो काम मिल जाए, उससे विजय दोनों के इलाज का पैसा जुटा रहा था।
अब वही पिछले 12 दिनों से अस्पताल के बिस्तर पर है लेकिन नितिन की इंसानियत ही खत्म हो गई है। परिजनों ने नितिन के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे कड़ी सजा दिलाने की मांग की है क्योंकि विजय की हालत के लिए वही जिम्मेदार है।

