नागपुर: शहर में पेड़ों के चारों ओर बनाए गए कंक्रीट और पेवर ब्लॉक्स को लेकर नागपुर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने नागपुर मनपा आयुक्त से पूछा है कि शहर में कितने पेड़ अब भी कंक्रीट के जाल में फंसे हुए हैं और उन्हें कितने दिनों में इस जाल से मुक्त किया जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में 10 मार्च तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह मामला जागरूक नागरिकों द्वारा दाखिल जनहित याचिका के बाद सामने आया है, जिस पर अदालत में सुनवाई हुई।
जनहित याचिका के बाद कोर्ट की सख्ती
शहर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर शरद पाटील, प्राची माहूरकर, यश नेटके और प्रीती पटेल ने अदालत में जनहित याचिका (PIL) दायर की है। इस याचिका पर न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोड़े की खंडपीठ के सामने सुनवाई हुई।
मनपा की रिपोर्ट पर कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान नागपुर मनपा की ओर से जानकारी दी गई कि
- मार्च 2025 में 3326 पेड़ों को कंक्रीट के जाल से मुक्त किया गया।
- फरवरी 2026 में 4123 पेड़ों को कंक्रीट से आजाद कराया गया।
इस पर अदालत ने कार्रवाई की धीमी गति पर नाराजगी जताई और कहा कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में इतनी धीमी कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।
कंक्रीट के कारण पेड़ों पर बढ़ रहा खतरा
शहर के कई इलाकों में पेड़ों के चारों तरफ सीमेंट कंक्रीट, बिटुमेन और पेवर ब्लॉक्स लगा दिए गए हैं। इससे
- पेड़ों की जड़ों तक पानी नहीं पहुंच पाता
- मिट्टी में नमी कम हो जाती है
- और धीरे-धीरे पेड़ सूखने लगते हैं
नियम क्या कहते हैं
पर्यावरण नियमों के अनुसार, हर पेड़ के तने के चारों तरफ कम से कम 1.25 मीटर जमीन खुली छोड़ना अनिवार्य है, ताकि
- पानी जमीन में समा सके
- पेड़ों की जड़ों को पर्याप्त हवा और पोषण मिल सके
कोर्ट में किसने रखी दलील
इस मामले में
- याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राधिका बजाज ने पक्ष रखा
- जबकि मनपा की ओर से अधिवक्ता जेमिनी कासट ने अदालत में दलील पेश की

