भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना में दो पायलटों की मौत हो गई। इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर शहीद हो गए। यह विमान असम के कार्बी आंगलोंग जिले में प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, विमान ने असम के जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी थी, लेकिन उड़ान के कुछ समय बाद ही उसका रडार से संपर्क टूट गया। बाद में पता चला कि विमान लगभग 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
इस हादसे में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर महाराष्ट्र के नागपुर के निवासी थे और वे भारतीय वायुसेना के एक समर्पित अधिकारी माने जाते थे।
सुखोई-30 एमकेआई विमान प्रशिक्षण मिशन पर था
इस दुर्घटना के समय सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था। उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही विमान का रडार संपर्क लगभग शाम 7:42 बजे टूट गया, जिसके बाद खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया। बाद में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि हुई।
ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी अहम भूमिका
फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर ने पिछले वर्ष भारतीय वायुसेना के “ऑपरेशन सिंदूर” में भी हिस्सा लिया था, जो आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सैन्य अभियान माना जाता है। खास बात यह है कि इस मिशन के दौरान उनके परिवार को भी शुरुआत में इसकी जानकारी नहीं थी।
10 दिन पहले ही परिवार से मिलने आए थे घर
बताया जा रहा है कि पूर्वेश दुरगकर लगभग 10 दिन पहले नागपुर स्थित अपने घर आए थे और परिवार के साथ समय बिताकर फिर ड्यूटी पर लौट गए थे। हादसे की खबर मिलने के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में शोक की लहर है।
भारतीय वायुसेना ने जताया शोक
भारतीय वायुसेना ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए। वायुसेना ने दोनों अधिकारियों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और उन्हें हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया।

