आगामी कन्हान-पिपरी नगर परिषद चुनावों की आचार संहिता लागू हो चुकी है। चारों ओर चुनावी सरगर्मियां तेज़ हैं और हर पार्टी अपने-अपने प्रत्याशियों की दावेदारी तय करने में जुटी हुई है। इस बार कन्हान का रोस्टर ओबीसी-सर्व साधारण है, यानी इस श्रेणी में आने वाले उम्मीदवारों के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
बीजेपी की ओर से पूर्व सरपंच और नगर परिषद के उपाध्यक्ष रह चुके डॉ. मनोहर पाठक दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं पहली बार मनोनीत और दूसरी बार चुने गए नगर सेवक राजेंद्र शेंद्रे भी बीजेपी से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।
वे विपक्षी नेता के रूप में पहले ही नगर परिषद में काम कर चुके हैं।
कांग्रेस की बात करें तो राजेश यादव का नाम सामने आता है, जो लगभग 35 वर्षों से लोक प्रतिनिधि के रूप में ग्राम पंचायत और नगर परिषद में अपनी सेवाएँ देते आए हैं। उनके साथ गेंदलाल काठोके भी कांग्रेस से मैदान में हैं, जो स्वच्छता एवं पानी पुरवठा विभाग के सभापति रह चुके हैं।
शिवसेना (शिंदे गट) की ओर से वर्धराज पिल्ले का नाम दावेदारों में है, जो लंबे समय से पार्टी के ज़िला उपप्रमुख के रूप में सक्रिय रहे हैं। वे ज़िप चुनाव लड़ चुके है , उस समय कुछ ही वोटो से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था .
उनके अलावा करुणा अनिल आष्टांकर, जो हाल ही में नगर परिषद की अध्यक्ष थीं , पूर्व प.स. सभापति रह चुकी है और महिला जिला प्रमुख हैं, वे भी चुनावी मैदान में उतर रही हैं।
कन्हान नगराध्यक्ष के लिए सतीश बेलसरे भी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। वो पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) की पार्टी से जुड़े हुए थे और अभी उन्होंंने अपना खुद का एक यूथ फाउंडेशन बनाकर अलग-अलग प्रभागों से अपने उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई है। तो ये एक नया मोड़ आ सकता है चुनावी समीकरण में।
हालांकि, कन्हान में हमेशा से दिग्गज नेताओं की कमी नहीं रही, लेकिन विकास आज भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। जिसमे प्रमुखतः सत्रापुर, सिहोरा, MG नगर, पिपरी ऐसे क्षेत्र है जहाँ आज भी लोग पानी ,स्वच्छता और सड़क से वंचित है. अब देखना यह होगा कि इस बार कन्हान-पिपरी की जनता किसे नगराध्यक्ष के रूप में चुनती है और क्या वाकई इस चुनाव के बाद कन्हान के विकास की नई राह खुलती है?

