मुंबई/महाराष्ट्र: राज्य सरकार ने राशन कार्ड धारकों की पात्रता की सख्त जांच शुरू कर दी है। अब जिन लोगों के नाम पर 1 हेक्टेयर (लगभग 2.5 एकड़) से अधिक कृषि भूमि दर्ज है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें सब्सिडी वाले राशन के लाभ से वंचित किया जा सकता है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।
सरकार ने शुरू की व्यापक पात्रता जांच
राज्य सरकार द्वारा राशन कार्ड धारकों की डिजिटल वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू की गई है। इस प्रक्रिया में आधार डेटा, भूमि रिकॉर्ड और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है। उद्देश्य है कि अपात्र लोगों को सूची से बाहर किया जा सके।
1 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर होगी कार्रवाई
जिन परिवारों के नाम पर 1 हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि दर्ज पाई जाएगी, उन्हें राशन कार्ड की पात्रता से बाहर किया जा सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग द्वारा नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एग्रीस्टैक और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड का उपयोग
सरकार डिजिटल भूमि रिकॉर्ड (AgriStack डेटा) की मदद से जमीन की सटीक जानकारी प्राप्त कर रही है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन-कौन से लाभार्थी निर्धारित सीमा से अधिक संपत्ति रखते हैं और फिर भी सरकारी सब्सिडी का लाभ ले रहे हैं।
अन्य पात्रता मानदंडों की भी हो रही जांच
केवल जमीन ही नहीं, बल्कि अन्य कई मानकों पर भी जांच की जा रही है, जैसे:
- परिवार की वार्षिक आय
- घर में चार पहिया वाहन या अन्य महंगी संपत्ति
- डुप्लीकेट राशन कार्ड
- आधार से संबंधित विसंगतियां
इन सभी बिंदुओं के आधार पर अंतिम पात्रता तय की जाएगी।
सरकार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
सरकार का कहना है कि यह कदम गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सही लाभ दिलाने के लिए उठाया गया है। अपात्र लोगों को हटाने से सरकारी अनाज और सब्सिडी का सही वितरण संभव हो सकेगा।

