अंतिम समीक्षा के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा
नागपुर (व्यापार संवाददाता) : मिहान क्षेत्र में स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट (SIDM) का स्थायी कैंपस स्थापित किया जाएगा। इस संबंध में तैयार प्रस्ताव को अंतिम समीक्षा और स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेज दिया गया है। महा-मेट्रो के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि संस्थान मिहान में ही बनाया जाएगा और सरकार की मंजूरी मिलते ही भूमि स्तर पर कार्य शुरू किया जाएगा।
यह संस्थान मिहान के नॉन-सेज क्षेत्र में 10 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए राज्य सरकार द्वारा 184.94 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय को सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है। SIDM महाराष्ट्र का पहला समर्पित आपदा प्रबंधन संस्थान होगा, जो आपदा की तैयारी, प्रशिक्षण, अनुसंधान और नीति निर्माण के लिए एक मॉडल केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
SIDM को आत्मनिर्भर राज्य स्तरीय संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित कैंपस में आधुनिक ऑडिटोरियम, व्यावहारिक प्रशिक्षण और संवाद आधारित गतिविधियों के लिए बड़े खुले क्षेत्र, अत्याधुनिक सिमुलेशन सुविधाएं, प्रशिक्षणार्थियों और कर्मचारियों के लिए आवासीय व्यवस्था तथा अधिकारियों और प्रशिक्षकों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही लेआउट में फिटनेस सेंटर, आवश्यक सहायक बुनियादी ढांचा और बेहतर कनेक्टिविटी की व्यवस्थाएं भी शामिल होंगी।
इस परियोजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी महा-मेट्रो को सौंपी गई है। कैंपस का डिजाइन और विकास योजना महा-मेट्रो द्वारा इन-हाउस तैयार की गई है। सरकार से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद निविदा प्रक्रिया, निर्माण कार्य और परियोजना की निगरानी शुरू की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, SIDM के मॉडल को तैयार करने के लिए देश के प्रमुख आपदा प्रबंधन संस्थानों का अध्ययन किया गया है। इसमें विशाखापत्तनम के पास स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट और गुजरात इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट के कार्यप्रणाली और अनुभवों को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है। इन संस्थानों से प्राप्त मार्गदर्शन और सर्वोत्तम प्रथाओं को महाराष्ट्र के प्रस्तावित SIDM कैंपस की योजना में शामिल किया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि SIDM राज्य की आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भविष्य में यह संस्थान प्रशिक्षण, अनुसंधान और नीति निर्धारण के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होगा।

